Volume 14 (September - October , 2017)

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1
पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर साम्प्रदायिकता का प्रभाव और हिंदी कहानी
मुल्ला आदम अली
01-02
Hindi
2
विद्यावतां भागवते परीक्षा (श्रीमद्भागवते विद्यातत्त्वविमर्शः)
नीरज नौटियाल
03-06
Sanskrit
3
परमपरागत एवं आधुनिक छात्रध्यापकों के सृजनात्मक चिन्तन का सामाजिक परिपक्वता के सन्दर्भ में तुलनात्मक अध्ययन
डॉ. अमिता पाण्डेय भारद्वाज , अनूप बलूनी
07-11
Sanskrit
4
उपनिषदां परिचयः
रजनी
12-14
Sanskrit
5
An ideal India: Economic Justice as a Social Justice to the Society
Dr. Uroos Fatima Rizvi , Saba Fakhruddin
15-19
English
6
वनस्पतेः कृते भूमिचयनविचारः
सुदर्शन दत्तः
20-22
Sanskrit
7
न्यायवैशेषिकयोः आत्मप्रमेयम्
नवीन कुमार
23-24
Sanskrit
8
“सुखदुःखात्मको रस:,एक संक्षिप्त विवेचना’’
दयानन्द पटेल
25-26
Sanskrit
9
Global Expertise of Chinese and Indian Market for the Reminiscent Strategy
Dr. Uroos Fatima Rizvi , Saba Fakhruddin
27-31
English
10
जातकस्य जीवने वक्रीग्रहस्य फलम्
संजीवकुमारः
32-34
Sanskrit
11
जातकस्य जीवने वक्रीग्रहस्य प्रभावः
संजीवकुमारः
35-37
Sanskrit
12
महाभारत युद्ध में द्रोण का महत्व
कु. पूनम
38-39
Sanskrit
13
भारतीयतत्त्वचिंतने प्रस्थानत्रयस्य प्रामाण्यव्यवस्थापनम्
आशीष यादव
40-44
Sanskrit
14
सूर्यादिवासरेषु ग्रहणाधारेण अर्घविचारः
कपिल देव
45-46
Sanskrit
15
संस्कृत लघुकाव्य - “नवेक्षिका’’ में सामाजिक परिदृश्य-एक विवेचन
प्रो. जया तिवारी
47-50
Sanskrit
16
ज्योतिषशास्त्रे सस्यवनस्पतीनां वर्णनम्
सुदर्शन दत्तः
51-52
Sanskrit
17
सन्देश काव्य का उदय तथा अभ्युदय
डॉ.नीता आर्य
53-54
Sanskrit
18
आधुनिकहिन्दुविधेः दत्तकग्रहणनियमाः
Saroj kumar kar
55-57
Sanskrit
19
हिन्दी साहित्य और सिनेमा
निशा वर्मा
58-59
Hindi
20
आधुनिकहिन्दुविधेः हिन्दूत्तराधिकारविधिः
Saroj kumar kar
60-62
Sanskrit
21
‘बहुजन’ उपन्यास में बदलता परिवेश
प्रा. राजेंद्र घोडे
63-64
Hindi
22
Media in the age of globalization
Neena Kumari
65-66
English
23
जनवादी कवि ‘अवतार सिंह संधू’ उर्फ ‘पाश’
सुनील कुमार
67-70
Hindi
24
श्रीकाण्ठदर्शनस्य मौलिकत्वम
अनीता कुमारी
71-72
Sanskrit
25
आवाज़ का नीलाम एकांकी की प्रासंगिकता
ज्योति रानी
73-75
Hindi
26
व्यञ्जनायाः स्वरूपम्
डॉ. के. अनन्तः
76-78
Sanskrit
27
वास्तुशास्त्रे ग्रामलक्षणानि
डा. के.टि.वि. राघवन्
79-80
Sanskrit

 

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