| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
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| 1 | भारतीयज्ञानपरम्परानुसारेण श्रीमद्भागवद्गीतायाः तत्त्वविमर्शः। “A Philosophical Inquiry into the Bhagavad Gita in Accordance with the Indian Knowledge Tradition” Dr. Abhijit Nandi |
82-86 | Sanskrit |
| 2 | नागेशानुसारं हलन्त्यमिति सूत्रपरिप्रेक्ष्येऽन्योन्याश्रयदोषविमर्शः शुभ्रजित्पालः |
75-81 | Sanskrit |
| 3 | स्मार्तधर्मपरम्परायाम् आह्निककृत्यानि डॉ. शकुन्तलादाशः |
64-69 | Sanskrit |
| 4 | काव्यभेदा: डाँ. मिथुनकुमारशतपथी |
62-63 | Sanskrit |
| 5 | “दुहादिद्विकर्मकधातूनां धात्वर्थसन्दर्भे दीक्षितनागेशयोर्वैमत्यम्” दीपककुमारचौधरी |
58-61 | Sanskrit |
| 6 | ग्रन्थान्तरतुलनया कुमारसम्भवीयः प्रतिनायकपरिचयः Dr. C. Hariharan |
54-57 | Sanskrit |
| 7 | মহাভারত ও নারী মল্লিকা সেন |
49-53 | Sanskrit |
| 8 | विद्यारम्भसंस्कारस्य कालशास्त्रदृष्ट्या मुहूर्तनिरूपणम्॥ गुरुप्रसाद श्रीधर हेगडे |
35-36 | Sanskrit |
| 9 | वास्तुशास्त्रपरम्परायां राजप्रासादानां प्रमुखशैली राहुलदे |
20-23 | Sanskrit |
| 10 | प्रबोधमिश्रविरचिते प्रज्ञादूते जगत्स्वरूपविमर्शः Snigdha Swarupa Barik |
11-15 | Sanskrit |
| 11 | भारतीयवास्तुशास्त्रे गृहनिर्माणस्य अवधेयांशाः डा राघवेन्द्रः |
06-10 | Sanskrit |
| 12 | ऐक्यप्रतिष्ठायै नैकाशाखा डाँ. मिथुनकुमारशतपथी |
317-318 | Sanskrit |
| 13 | “लकारार्थविवेचनपुरस्सरं किरातार्जुनीयमहाकाव्ये प्रयुक्तकेषाञ्चन तिङन्तपदानां शब्दशास्त्रीयं समीक्षणम्” धीरजकुमारचौधरी |
312-316 | Sanskrit |
| 14 | अद्वैतवेदान्तोक्तरीत्या सृष्टिप्रक्रिया Dr.Monojit Mukherjee |
309-311 | Sanskrit |
| 15 | पाणिनिकातन्त्रव्याकरणयोः कारकलक्षणविमर्शः ऐन्दवी आर्या |
305-308 | Sanskrit |
| 16 | देवभूमिहिमाचलप्रदेशे वर्त्तमानपरिप्रेक्ष्ये यौगिकसाद्धकानां प्रासाङ्गिकता खेमराजः |
301-304 | Sanskrit |
| 17 | मुहूर्त शास्त्र : एक शास्त्रीय विवेचन डॉ. पवनकुमार मिश्र |
298-300 | Sanskrit |
| 18 | वाल्मीकी रामायण में नदीयाँ तथा जलसंरक्षण के उपाय सौ. सुवर्णा संजयकुमार केवटे , प्रो. कविता सु. होले |
293-297 | Sanskrit |
| 19 | व्याकरणशास्त्रे मनुस्मृतौ च दण्डविधानम् प्रो.सुजातात्रिपाठी |
286-290 | Sanskrit |
| 20 | सिंहलविजयनाटके प्राकृत्रिकचित्रणाभिप्रेरणम् दीप्तिरेखा मिश्र |
284-285 | Sanskrit |
| 21 | वास्तुशास्त्र-दृष्ट्या देहलीनगरस्य चिन्तनम् चन्दन पाण्डेय, डॉ अशोक थपलियाल |
281-283 | Sanskrit |
| 22 | कालीपद तर्काचार्य की वाग्वैदग्ध्यपूर्ण स्वारस्वत साधना पर न्याय और वैशेषिक दर्शन का प्रभाव। Bishwaketu Barman |
275-277 | Sanskrit |
| 23 | संस्कृतवाङ्गमये मानवाधिकारचिन्तनम् डॉ. सुमितकुमारशर्मा |
271-274 | Sanskrit |
| 24 | 5.5 गरुडपुराणे समुपदिष्टनीतीनां वैशिष्ट्यं तासां साम्प्रति-कन्यायव्यवस्थाया- मवदानचिन्तनञ्च शकुन्तला शुक्ला, प्रो. देवेन्द्र प्रसाद मिश्र |
267-270 | Sanskrit |
| 25 | पुरातन-नूतन-वेदभाष्यकाराणां समालोचनायाः एकम् अध्यायनम् Mallika Sen |
253-258 | Sanskrit |
| 26 | “अभिज्ञानशाकुन्तलम्” इति नाटके मार्गदर्शन-परामर्शतत्त्वानां तात्त्विकमध्ययनम् गायत्री पण्डा |
246-248 | Sanskrit |
| 27 | वैदिकसन्ध्योपासनपद्धतिविमर्श: जयप्रकाशपाठक: |
240-243 | Sanskrit |
| 28 | गुल्मिनी गीतिकाव्ये प्रकृतिचित्रणम् -एकम् अध्ययनम् लक्ष्मीश्री बेहेरा |
237-239 | Sanskrit |
| 29 | सामवेदीय-ऋक्तन्त्रोक्तवर्णोच्चारणविधीनां विमर्शः हरिश्चंद्र मालू गवस, प्रो.हरेकृष्ण अगस्ती |
233-236 | Sanskrit |
| 30 | आधुनिकसंस्कृतसाहित्यस्य विकासपरम्परायां रामाशीषपाण्डेयस्य अवदानं निरीक्षणम् मधुमिता दासः |
229-232 | Sanskrit |
| 31 | वैयाकरणसिद्धान्तकौमुद्याः स्त्रीप्रत्ययान्तानां नवीनोदाहरणानि सुभाष-वैद्यः |
222-225 | Sanskrit |
| 32 | पाणिनीये ‘आख्यातोपयोगे’ इति सूत्रस्य पदार्थविमर्शः कौशिक-प्रधानः |
218-221 | Sanskrit |
| 33 | सिद्धसिद्धान्तपद्धतौ सद्गुरुतत्त्वं तथा अवधूतयोगिलक्षणम् पुलक-दासः |
208-212 | Sanskrit |
| 34 | विशिष्टाद्वैसिद्धान्तपरिचयः ब्रह्मसूत्रप्रमेश्च आर् यश्वन्त श्रीशायि दीक्षितः |
204-207 | Sanskrit |
| 35 | पाणिनीयव्याकरणे परिभाषासूत्रस्य प्राशस्त्यम् Dr. Dilip Kumar Das |
201-203 | Sanskrit |
| 36 | जीवानन्दनम् नाटक में मानवीय मूल्य आकांक्षा द्विवेदी |
197-200 | Sanskrit |
| 37 | वर्तमानकाले मानवाणां दुःखनिवारणे सांख्यदर्शनस्य प्रासङ्गिकता Debarati Datta |
193-196 | Sanskrit |
| 38 | आचार्यहेमचन्द्रस्य ध्यानयोगस्य सिद्धान्तपरकसंरचना प्रासंगिकता च दीपक कुमार |
190-192 | Sanskrit |
| 39 | असिद्धं बहिरङ्गमन्तरङ्गे इति परिभाषयाः विश्लेषणं डॉ० आभा जैन |
185-186 | Sanskrit |
| 40 | आचार्यबनमालीबिश्वालविरचितकाव्येषु नारीस्वरूपविमर्शः स्नेहाञ्जलि साहु |
181-184 | Sanskrit |
| 41 | योग एवं मनोविज्ञान के अंतसंबंधः (मानव स्वास्थ्य के विशेष संदर्भ में) अभिषेक कुमार, प्रो.जवाहर लाल |
177-180 | Sanskrit |
| 42 | वास्तुशास्त्रे पञ्चमहाभूत-प्राकृतिकशक्तिनां विमर्श: Ruchika Upadhyay, Dr. Yogendra Kumar Sharma |
167-171 | Sanskrit |
| 43 | मीमांसा-वेदान्त-सांख्याभिमत अवयवत्रयवादपरम्पराविमर्शः सन्तोषी महापात्रः |
163-166 | Sanskrit |
| 44 | अलङ्कारेषु व्याकरणसिद्धान्ता: सुमन कोइराला |
160-162 | Sanskrit |
| 45 | প্রাচীন ‘মনুসংহিতার’ বর্ণ-ব্যবস্থা বনাম বর্তমান সমাজে দলিত সম্প্রদায় Aditi Mandal |
157-159 | Sanskrit |
| 46 | भारतीयदर्शनेषव्यक्तित्वविकासोपायाः डां. नरेन्द्र कुमारः |
152-156 | Sanskrit |
| 47 | ‘त्रिगुणात्मकान्तःकरणवृत्तेः विचारः’ (Study of Triguṇa natured Antaḥkaraṇa according to Vedānta philosophy) विजयलक्ष्मी अम्माल् |
150-151 | Sanskrit |
| 48 | वैज्ञानिकमते सृष्ट्युत्पत्तौ कालाकाशयोर्भूमिका Dr. Lipi Patra |
145-149 | Sanskrit |
| 49 | अर्वाचीन एवं प्राचीन वेद भाष्यकारों का समीक्षात्मक अध्ययन अवधेश सिंह |
141-144 | Sanskrit |
| 50 | अद्वैतवेदान्ते अविद्या – अध्यास – जीवन्मुक्तितत्त्वानां तात्त्विकमीमांसा (A Research Study on Avidyā, Adhyāsa and Jīvanmukti in Advaita Vedānta) कल्याणी पाण्डा |
137-140 | Sanskrit |
| 51 | शून्ये मेघगानमिति काव्यग्रन्थे उपमानां नव्यता डॉ सङ्गीता मण्डल |
117-119 | Sanskrit |
| 52 | राष्ट्रभृत् होम: एक अध्ययन। शुभमकुमारपाण्डेय |
113-116 | Sanskrit |
| 53 | द्वैतदर्शने प्रामाणिकप्रतियोगिकत्वं मुनित्रयसम्मतम् कृष्णाचार्य पुरोहितः |
108-112 | Sanskrit |
| 54 | लघुत्रय्यां बृहत्त्रय्यां गुणपरिमानविचारसमीक्षणम् Sanchita Chakraborty |
105-107 | Sanskrit |
| 55 | प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा में नारी महिमा मनोज कुमार शुक्ल, तरुण कुमार शर्मा |
97-100 | Sanskrit |
| 56 | भारतविजयनाटके धर्मशास्त्रीयमूल्यम् अक्षयकुमाररायः |
89-91 | Sanskrit |
| 57 | जनजातीयानामुत्थाने आदिवासिमहापुरुषस्य श्रीरामेश्वरस्य शैक्षिकमाध्यात्मिकयोगदानम् कुमारी शीतला, डॉ.जि.नरसिम्हुलु |
84-88 | Sanskrit |
| 58 | विदग्धमाधवम् नाटकस्य काव्यशास्त्रीयमध्ययनम् सुनन्दा दे |
77-83 | Sanskrit |
| 59 | विवाहविधिः Dr. Markanda Nayak |
68-70 | Sanskrit |
| 60 | काण्वशतपथब्राह्मणे निरूपितस्य अग्न्याधेयस्य कालवैविध्यपरिशीलनम् एच वी अमरनाथ |
64-67 | Sanskrit |
| 61 | ‘अथातो ब्रह्मजिज्ञासा’ : ब्रह्मसूत्र का दार्शनिक आधार डॉ० दीपक कुमार पाठक |
55-59 | Sanskrit |
| 62 | भारतीय ज्ञान परम्परा में भूगर्भ विज्ञान डॉ प्रभात नारायण पाण्डेय |
52-54 | Sanskrit |
| 63 | अदर्शनं लोप: महाभाष्यदृष्ट्या तत्त्वमीमांसा Dr. Santosh Majhi |
50-51 | Sanskrit |
| 64 | वैदिककालीन अर्चना-परम्परा एवं वास्तु-विज्ञान डॉ. पुष्पेन्द्र जोशी |
46-49 | Sanskrit |
| 65 | ‘कविवररामलखनपाण्डेयस्य कृतीनां परिचयात्मकं विवेचनम्’ हरिश्चन्द्रः, प्रो.सनन्दनकुमारत्रिपाठी |
40-45 | Sanskrit |
| 66 | मृच्छकटिकाधारेण आदर्शः चरित्रं चारुदत्तः डॉ. हेमन्तकुमार नेपाल |
35-39 | Sanskrit |
| 67 | देवीपुराणे योगसम्मतेश्वरतत्त्वविमर्शः Snigdha Poddar |
32-34 | Sanskrit |
| 68 | शुक्लयजुर्वेदे स्वरभक्तिः आराध्युल रमेशः |
17-19 | Sanskrit |
| 69 | “पत्युर्नो यज्ञसंयोगे” इति सूत्रे निहितः स्त्रीस्थानविमर्शः – सामाजिकभाषाशास्त्रीयं विश्लेषणम्। Dr. Thahira P. |
08-09 | Sanskrit |
| 70 | अष्टमाध्यायनिरूपणम् पार्वणहोमविचारश्च Dr. C. Hariharan |
345-348 | Sanskrit |
| 71 | पाणिनीयव्याकरणे कर्तृस्वरूपविमर्शः डा. हेमन्त कुमार मुदुलिः |
343-344 | Sanskrit |
| 72 | प्राप्तप्रातिशाख्यग्रञ्चानां परिचयः अशोककुमारषडङ्गी , डॉ. पूर्णचन्द्रपाधि |
337-339 | Sanskrit |
| 73 | श्रीमद्भागवते नवधाभक्तिः डाँ. मिथुनकुमारशतपथी |
334-336 | Sanskrit |
| 74 | सिंहलविजयनाटके नाटकलक्षणसमन्वयः दीप्तिरेखा मिश्र |
326-328 | Sanskrit |
| 75 | अथर्ववेदे विविधकर्माणि Dr. Balabhadra Upadhyaya |
323-325 | Sanskrit |
| 76 | मातृभूमिचरितमहाकाव्ये वर्णविन्यासवक्रता द्वितीकृष्ण पाणिग्राही |
320-322 | Sanskrit |
| 77 | पाद्मसंहितानुसारं दशावतारमूर्तिकल्पनम् यस् . गोपालकृष्णः |
313-315 | Sanskrit |
| 78 | संसारोच्छेदो मुक्तिः मामिना साहुः |
308-312 | Sanskrit |
| 79 | वेदान्तशास्त्रे ब्रह्मस्वरूपम् एकम् अध्ययनम् मधुमिता गुच्छाइत् |
300-305 | Sanskrit |
| 80 | वराहपुराणे वर्णितं व्रताः उत्सवाश्च : भारतीयलोकसंस्कृतिः सन्दर्भे रणजित् बाग्दी, डॉ. हरीशदासः |
297-299 | Sanskrit |
| 81 | रुचिकराणि भोज्यपदार्थानि Dr. T. Venkateswarlu |
293-296 | Sanskrit |
| 82 | उपनिषत्सु मुख्यब्रह्मोपसनाविचारविमर्शः Dr. Santu Kumar Pan |
288-292 | Sanskrit |
| 83 | उपनिषद्वाङ्मये राष्ट्रस्य महत्त्वम् Dr. M. Dattatraya Sharma |
285-287 | Sanskrit |
| 84 | दूतकाव्यपरम्परायां जीमूतदूतम् दुर्गाशङ्करपण्डा |
282-284 | Sanskrit |
| 85 | उपनिषदां दार्शनिकमहत्त्वम् (उपनिषदां स्वरूपम्, विषयः, संख्या, दर्शनम् च) N.Aravindhan |
279-281 | Sanskrit |
| 86 | कालिदासरूपकेषु प्रेमिक-प्रेमिकयोः चरितविमर्शः गौराङ्ग साउ |
272-278 | Sanskrit |
| 87 | योगदर्शने आध्यात्मिक भक्तियोगाश्च डा. सुप्रिया वेरा |
263-266 | Sanskrit |
| 88 | विशिष्टाद्वैतवेदान्तानुसारं गीतायामात्मतत्त्वविचारः Dr. Markanda Nayak |
259-262 | Sanskrit |
| 89 | वैदिक कालीन भारत में गणतंत्र व्यवस्था के तत्व : एक ऐतिहासिक-दार्शनिक अनुशीलन डॉ० दीपक कुमार पाठक |
251-254 | Sanskrit |
| 90 | रामायणे वर्णिता पाककला सन्दीपन रायः |
247-250 | Sanskrit |
| 91 | “भाषाशिक्षणे सूचनासंचारप्रौद्योगिक्यनुप्रयोगे समस्याः समाधानञ्च” मनोज कुमार पांडेयः, डाँ. शिवदत्त आर्यः |
224-229 | Sanskrit |
| 92 | संस्कृतसाहित्ये छन्दोविचारः, छन्दस्सु अनुष्टुपछन्द: Dr.Harikrishna Kondapalli |
222-223 | Sanskrit |
| 93 | प्राचीन भारतीय राजव्यवस्था: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में Dr. Darin Sarkar |
218-221 | Sanskrit |
| 94 | महाभाष्यकारस्य पतञ्जलेर्व्याख्यानपद्धतिः गणेशमहतो, सदानन्दः |
209-212 | Sanskrit |
| 95 | पातञ्जल महाभाष्यटीका सूक्तिरत्नाकर का ऊह सम्बधित परिप्रेक्ष्य संजीव कुमार, प्रोफेसर ओमनाथ बिमली |
192-198 | Sanskrit |
| 96 | वेणीसंहारे सुवदनाचरित्रचित्रणम् सिद्धार्थवैराग्यः |
188-191 | Sanskrit |
| 97 | शाङ्कराचार्य-शैवदर्शनयोः अद्वैतवादस्य विश्लेषणात्मकमध्ययनम् अशोका रुइदास |
184-187 | Sanskrit |
| 98 | चक्रपाणिटीकानुसारं चरकसंहितायाः सूत्रस्थानस्य प्रथमचत्वारोऽध्यायानां समीक्षा डा.तरुण कुमार माइति |
170-173 | Sanskrit |
| 99 | भारतीयज्ञानपरम्परायां संस्कृतभाषाविज्ञानस्य तथा व्याकरणस्य योगदानम्। डा. मिलनमाजी |
165-169 | Sanskrit |
| 100 | अजेर्व्यघञपोः सूत्रविमर्शः श्री शिवप्रसाद शुक्लः |
126-129 | Sanskrit |
