| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | कालीपदतर्काचार्यविरचितमन्दाक्रान्तावृत्तखण्डकाव्ये गुणसन्निवेशनविधिः मनामी वैराग्य |
68-70 | Sanskrit |
| 2 | आधुनिकसंस्कृतसाहित्येतिहासे डा. निऱञ्जनमिश्रस्य योगदानम् Alpana Paul |
62-64 | Sanskrit |
| 3 | श्रीमद्रामायणानुसारेण भारतीयज्ञानपरम्परायाम् अयोध्यायाः संस्कृतिः चन्द्रप्रकाशपाण्डेयः |
59-61 | Sanskrit |
| 4 | इन्द्रियमनादितत्त्वेभ्यः आत्मनः परत्वनिरुपणम् Pabitra Barman |
56-58 | Sanskrit |
| 5 | श्रीरामस्वामिपण्डितकृतराजतरलव्याख्यायां नाडीतत्त्वविचारः Sarathi Barman |
51-55 | Sanskrit |
| 6 | अर्थशास्त्रे गुप्तचर व्यवस्था-एकं समीक्षात्मकमध्ययनम् Dr. Manoja Tripathy |
41-44 | Sanskrit |
| 7 | देवीदानवीयकाव्ये रसध्वनिविवेकः Madhu Sudan Saha |
38-40 | Sanskrit |
| 8 | महाकवि श्रीहर्ष के नैषधीयचरित में न्याय एवं वैशेषिक दर्शन का प्रभाव : चयनित श्लोकों के आलोक में Bishwaketu Barman |
34-37 | Sanskrit |
| 9 | चित्रनैषधकाव्ये मूलकथा तोलनम् Madhu Sudan Saha |
29-31 | Sanskrit |
| 10 | भर्तृहरिमते कालः प्रवेशकुमारः, डा. विनिताशर्मा |
19-23 | Sanskrit |
| 11 | आधुनिकयुगे विद्यार्थिनां शैक्षिकोपलब्धौ स्मृतौ च योगाभ्यासस्य योगदानम् Mukesh Biswas |
15-18 | Sanskrit |
| 12 | देवीभागवते सम्वर्णितानां आध्यात्मिकशैक्षिकतत्त्वानां प्रासंगिकता सोमेश कुमार |
11-14 | Sanskrit |
| 13 | संस्कृतसाहित्ये अमात्यस्य वैशिष्ट्यम् सूरजचौबे |
07-10 | Sanskrit |
| 14 | बुद्धचरितसौन्दरनन्दयोः राष्ट्रचिन्तनम् मधुपर्णीदाशः |
04-06 | Sanskrit |
| 15 | भारतीयज्ञानपरम्परादृष्ट्या संगणकसहकृतशिक्षणमाध्यमेन संस्कृतव्याकरणशिक्षणनम् शुभ चौनी |
01-03 | Sanskrit |
| 16 | आधुनिकभारतस्य विकासे संस्कृतस्य स्थानम् मधुपर्णी दाशः |
244-246 | Sanskrit |
| 17 | आलङ्कारिकाणां रसवादविश्लेषणम् डा. छोटूकुमारमिश्रः |
240-243 | Sanskrit |
| 18 | आचार्य जि.एस्.आर्.कृष्णमूर्तिमहोदयानां संस्कृतसाहित्यक्षेत्रे अवदानम् जोगेश्वर गडत्या |
237-239 | Sanskrit |
| 19 | व्याकरणे कालस्य अवधारणा प्रवेशकुमारः, डा. विनिताशर्मा |
233-236 | Sanskrit |
| 20 | सनाद्यन्तप्रत्ययसन्दर्भे पाणिनिजैनेन्द्रयोस्तुलनात्मकमध्ययनम् सोनू शर्मा |
230-232 | Sanskrit |
| 21 | मनोवैज्ञानिकसिद्धान्तानां परिप्रेक्ष्ये विद्यार्थिनां समायोजनशैक्षिकोपलब्ध्योः सम्बन्धस्याध्ययनम् A Study of the Relation Between Students Adjustment and Academic Achievement from the Perspective of Psychological Theories बिजेन्द्रसिंहः, डा. भारती कौशलः |
219-225 | Sanskrit |
| 22 | ‘‘प्रकर्षार्थमन्तरेण क्वचित्स्वार्थेऽपि तरबस्ति’’ इति ज्ञापकविमर्शः। डॉ. धर्मपालप्रजापतः |
207-209 | Sanskrit |
| 23 | काव्यप्रकशस्य साहित्यदीपिकाटीकायाः तृतीय उल्लासः डॉ हरप्रिया हातिः |
205-207 | Sanskrit |
| 24 | संस्कृतवाङ्मये ‘छायापरम्परा’- एकं विश्लेषणात्मकम् अध्ययनम् Adweta Dash |
196-200 | Sanskrit |
| 25 | ভারতীয় জ্ঞানপরম্পরায় উপনিষদের মহত্ব স্বপনসিং |
192-195 | Sanskrit |
| 26 | भारतीयज्ञानपरम्परायां पुरा नारीणामद्भूता भूमिका सुकान्त कुमार बारिक |
187-191 | Sanskrit |
| 27 | औपनिषदिक नीतिशास्त्र का स्वरूप एवं समसामयिक उपयोग सुधांशु शेखर झा |
183-186 | Sanskrit |
| 28 | शास्त्रिस्तरीयच्छात्रेषु नाडीवैविध्यग्रहणन्यूनतानाम् अन्वेषणात्मकम् अध्ययनम् An Explorative study on the Lack of Embracement of Neurodiversity among Sastri level students. अतुल् श्रीराग्. के. आर् |
177-182 | Sanskrit |
| 29 | धर्मशास्त्रदृष्ट्या वनस्पतीनां धार्मिक-पर्यावरणीय- स्थायिविकासपरकं महत्त्वम् डॉ. सिद्धार्थशङ्करदाशः |
170-173 | Sanskrit |
| 30 | कृषि तथा भारतीयपर्वाणी- एकमध्ययनम् । प्रतिभा साहू |
167-169 | Sanskrit |
| 31 | स्मृतिग्रन्थेषु वर्णितं शैक्षिकमूल्यानि शुभश्री महान्ति |
164-166 | Sanskrit |
| 32 | भासनाटकचक्रे नारीपात्राणां योगदानम् अष्टमी बेज् |
156-158 | Sanskrit |
| 33 | लक्षणापेक्षाविमर्शः श्री गगनदीपः |
152-155 | Sanskrit |
| 34 | परिहासविजल्पिते हास्यरसविवेचनम् अनिलकुमारशुक्लः |
149-151 | Sanskrit |
| 35 | वास्तुशास्त्रस्य सामान्यपरिचयः महत्त्वञ्च डॉ. सन्तोषकुमारः |
133-134 | Sanskrit |
| 36 | पुरुषोत्तममाहात्म्ये श्रीजगन्नाथस्य परतत्त्वस्वरूपम् निताइबिश्वासः |
124-128 | Sanskrit |
| 37 | पाणिनिजैनेन्द्रयोर्लादेशप्रकरणस्य साम्यवैषम्यसमीक्षणम् डा. विनिताशर्मा , सोनू शर्मा |
110-113 | Sanskrit |
| 38 | प्रतिष्ठारहस्यम् – श्रुत्यागमसमन्वयविचारः R V Phaniram |
98-100 | Sanskrit |
| 39 | बृहस्पति गोचर 2026 : उच्चस्थ गुरु का दिव्य प्रभाव, राशिफल एवं उपाय प्रो. (डॉ.) पाडुर सुब्रमण्य शास्त्री |
91-93 | Sanskrit |
| 40 | उपनिषदों में योग : एक जीवन पद्धति नीरज कुमार |
87-90 | Sanskrit |
| 41 | भारतीयज्ञानपरम्परानुसारेण श्रीमद्भागवद्गीतायाः तत्त्वविमर्शः। “A Philosophical Inquiry into the Bhagavad Gita in Accordance with the Indian Knowledge Tradition” Dr. Abhijit Nandi |
82-86 | Sanskrit |
| 42 | नागेशानुसारं हलन्त्यमिति सूत्रपरिप्रेक्ष्येऽन्योन्याश्रयदोषविमर्शः शुभ्रजित्पालः |
75-81 | Sanskrit |
| 43 | स्मार्तधर्मपरम्परायाम् आह्निककृत्यानि डॉ. शकुन्तलादाशः |
64-69 | Sanskrit |
| 44 | काव्यभेदा: डाँ. मिथुनकुमारशतपथी |
62-63 | Sanskrit |
| 45 | “दुहादिद्विकर्मकधातूनां धात्वर्थसन्दर्भे दीक्षितनागेशयोर्वैमत्यम्” दीपककुमारचौधरी |
58-61 | Sanskrit |
| 46 | ग्रन्थान्तरतुलनया कुमारसम्भवीयः प्रतिनायकपरिचयः Dr. C. Hariharan |
54-57 | Sanskrit |
| 47 | মহাভারত ও নারী মল্লিকা সেন |
49-53 | Sanskrit |
| 48 | विद्यारम्भसंस्कारस्य कालशास्त्रदृष्ट्या मुहूर्तनिरूपणम्॥ गुरुप्रसाद श्रीधर हेगडे |
35-36 | Sanskrit |
| 49 | वास्तुशास्त्रपरम्परायां राजप्रासादानां प्रमुखशैली राहुलदे |
20-23 | Sanskrit |
| 50 | प्रबोधमिश्रविरचिते प्रज्ञादूते जगत्स्वरूपविमर्शः Snigdha Swarupa Barik |
11-15 | Sanskrit |
| 51 | भारतीयवास्तुशास्त्रे गृहनिर्माणस्य अवधेयांशाः डा राघवेन्द्रः |
06-10 | Sanskrit |
| 52 | संस्कृतस्तोत्रकाव्यानाम् उद्भवविकाशच्च मोनालिसा प्रधानः |
369-371 | Sanskrit |
| 53 | शृङ्गारप्रकाश के आलोक में वृत्तियाँ डॉ आयुष दीक्षित |
356-357 | Sanskrit |
| 54 | हठयोगप्रदीपिकायां राजयोगे च समाधेः स्वरूपम् व्यापर्ल गोवर्धन रेड्डि |
351-355 | Sanskrit |
| 55 | ज्योतिषशास्त्रे उन्मादरोगविमर्शः डॉ. हेम चन्द: |
348-350 | Sanskrit |
| 56 | भावात्मकाध्यात्मिकबुद्धेश्च: वैशिष्ट्यम् अनीता |
345-347 | Sanskrit |
| 57 | प्रक्रियाशास्त्रे दर्शनसमन्वयविमर्शः (An Inquiry into the Integration of Philosophy within Procedural Grammar) श्रीमान् गोपालकृष्णदाशः |
340-344 | Sanskrit |
| 58 | बीजमन्त्राणामुपचारपक्षविचारः Shrutishikha Sahoo, Sr. Prof. Anupama Prusty |
336-339 | Sanskrit |
| 59 | मनुस्मृतेः अनुशासनस्य समीक्षणम् डॉ. सिद्धार्थशङ्करदाशः |
327-331 | Sanskrit |
| 60 | ऐक्यप्रतिष्ठायै नैकाशाखा डाँ. मिथुनकुमारशतपथी |
317-318 | Sanskrit |
| 61 | “लकारार्थविवेचनपुरस्सरं किरातार्जुनीयमहाकाव्ये प्रयुक्तकेषाञ्चन तिङन्तपदानां शब्दशास्त्रीयं समीक्षणम्” धीरजकुमारचौधरी |
312-316 | Sanskrit |
| 62 | अद्वैतवेदान्तोक्तरीत्या सृष्टिप्रक्रिया Dr.Monojit Mukherjee |
309-311 | Sanskrit |
| 63 | पाणिनिकातन्त्रव्याकरणयोः कारकलक्षणविमर्शः ऐन्दवी आर्या |
305-308 | Sanskrit |
| 64 | देवभूमिहिमाचलप्रदेशे वर्त्तमानपरिप्रेक्ष्ये यौगिकसाद्धकानां प्रासाङ्गिकता खेमराजः |
301-304 | Sanskrit |
| 65 | मुहूर्त शास्त्र : एक शास्त्रीय विवेचन डॉ. पवनकुमार मिश्र |
298-300 | Sanskrit |
| 66 | वाल्मीकी रामायण में नदीयाँ तथा जलसंरक्षण के उपाय सौ. सुवर्णा संजयकुमार केवटे , प्रो. कविता सु. होले |
293-297 | Sanskrit |
| 67 | व्याकरणशास्त्रे मनुस्मृतौ च दण्डविधानम् प्रो.सुजातात्रिपाठी |
286-290 | Sanskrit |
| 68 | सिंहलविजयनाटके प्राकृत्रिकचित्रणाभिप्रेरणम् दीप्तिरेखा मिश्र |
284-285 | Sanskrit |
| 69 | वास्तुशास्त्र-दृष्ट्या देहलीनगरस्य चिन्तनम् चन्दन पाण्डेय, डॉ अशोक थपलियाल |
281-283 | Sanskrit |
| 70 | कालीपद तर्काचार्य की वाग्वैदग्ध्यपूर्ण स्वारस्वत साधना पर न्याय और वैशेषिक दर्शन का प्रभाव। Bishwaketu Barman |
275-277 | Sanskrit |
| 71 | संस्कृतवाङ्गमये मानवाधिकारचिन्तनम् डॉ. सुमितकुमारशर्मा |
271-274 | Sanskrit |
| 72 | 5.5 गरुडपुराणे समुपदिष्टनीतीनां वैशिष्ट्यं तासां साम्प्रति-कन्यायव्यवस्थाया- मवदानचिन्तनञ्च शकुन्तला शुक्ला, प्रो. देवेन्द्र प्रसाद मिश्र |
267-270 | Sanskrit |
| 73 | पुरातन-नूतन-वेदभाष्यकाराणां समालोचनायाः एकम् अध्यायनम् Mallika Sen |
253-258 | Sanskrit |
| 74 | “अभिज्ञानशाकुन्तलम्” इति नाटके मार्गदर्शन-परामर्शतत्त्वानां तात्त्विकमध्ययनम् गायत्री पण्डा |
246-248 | Sanskrit |
| 75 | वैदिकसन्ध्योपासनपद्धतिविमर्श: जयप्रकाशपाठक: |
240-243 | Sanskrit |
| 76 | गुल्मिनी गीतिकाव्ये प्रकृतिचित्रणम् -एकम् अध्ययनम् लक्ष्मीश्री बेहेरा |
237-239 | Sanskrit |
| 77 | सामवेदीय-ऋक्तन्त्रोक्तवर्णोच्चारणविधीनां विमर्शः हरिश्चंद्र मालू गवस, प्रो.हरेकृष्ण अगस्ती |
233-236 | Sanskrit |
| 78 | आधुनिकसंस्कृतसाहित्यस्य विकासपरम्परायां रामाशीषपाण्डेयस्य अवदानं निरीक्षणम् मधुमिता दासः |
229-232 | Sanskrit |
| 79 | वैयाकरणसिद्धान्तकौमुद्याः स्त्रीप्रत्ययान्तानां नवीनोदाहरणानि सुभाष-वैद्यः |
222-225 | Sanskrit |
| 80 | पाणिनीये ‘आख्यातोपयोगे’ इति सूत्रस्य पदार्थविमर्शः कौशिक-प्रधानः |
218-221 | Sanskrit |
| 81 | सिद्धसिद्धान्तपद्धतौ सद्गुरुतत्त्वं तथा अवधूतयोगिलक्षणम् पुलक-दासः |
208-212 | Sanskrit |
| 82 | विशिष्टाद्वैसिद्धान्तपरिचयः ब्रह्मसूत्रप्रमेश्च आर् यश्वन्त श्रीशायि दीक्षितः |
204-207 | Sanskrit |
| 83 | पाणिनीयव्याकरणे परिभाषासूत्रस्य प्राशस्त्यम् Dr. Dilip Kumar Das |
201-203 | Sanskrit |
| 84 | जीवानन्दनम् नाटक में मानवीय मूल्य आकांक्षा द्विवेदी |
197-200 | Sanskrit |
| 85 | वर्तमानकाले मानवाणां दुःखनिवारणे सांख्यदर्शनस्य प्रासङ्गिकता Debarati Datta |
193-196 | Sanskrit |
| 86 | आचार्यहेमचन्द्रस्य ध्यानयोगस्य सिद्धान्तपरकसंरचना प्रासंगिकता च दीपक कुमार |
190-192 | Sanskrit |
| 87 | असिद्धं बहिरङ्गमन्तरङ्गे इति परिभाषयाः विश्लेषणं डॉ० आभा जैन |
185-186 | Sanskrit |
| 88 | आचार्यबनमालीबिश्वालविरचितकाव्येषु नारीस्वरूपविमर्शः स्नेहाञ्जलि साहु |
181-184 | Sanskrit |
| 89 | योग एवं मनोविज्ञान के अंतसंबंधः (मानव स्वास्थ्य के विशेष संदर्भ में) अभिषेक कुमार, प्रो.जवाहर लाल |
177-180 | Sanskrit |
| 90 | वास्तुशास्त्रे पञ्चमहाभूत-प्राकृतिकशक्तिनां विमर्श: Ruchika Upadhyay, Dr. Yogendra Kumar Sharma |
167-171 | Sanskrit |
| 91 | मीमांसा-वेदान्त-सांख्याभिमत अवयवत्रयवादपरम्पराविमर्शः सन्तोषी महापात्रः |
163-166 | Sanskrit |
| 92 | अलङ्कारेषु व्याकरणसिद्धान्ता: सुमन कोइराला |
160-162 | Sanskrit |
| 93 | প্রাচীন ‘মনুসংহিতার’ বর্ণ-ব্যবস্থা বনাম বর্তমান সমাজে দলিত সম্প্রদায় Aditi Mandal |
157-159 | Sanskrit |
| 94 | भारतीयदर्शनेषव्यक्तित्वविकासोपायाः डां. नरेन्द्र कुमारः |
152-156 | Sanskrit |
| 95 | ‘त्रिगुणात्मकान्तःकरणवृत्तेः विचारः’ (Study of Triguṇa natured Antaḥkaraṇa according to Vedānta philosophy) विजयलक्ष्मी अम्माल् |
150-151 | Sanskrit |
| 96 | वैज्ञानिकमते सृष्ट्युत्पत्तौ कालाकाशयोर्भूमिका Dr. Lipi Patra |
145-149 | Sanskrit |
| 97 | अर्वाचीन एवं प्राचीन वेद भाष्यकारों का समीक्षात्मक अध्ययन अवधेश सिंह |
141-144 | Sanskrit |
| 98 | अद्वैतवेदान्ते अविद्या – अध्यास – जीवन्मुक्तितत्त्वानां तात्त्विकमीमांसा (A Research Study on Avidyā, Adhyāsa and Jīvanmukti in Advaita Vedānta) कल्याणी पाण्डा |
137-140 | Sanskrit |
| 99 | शून्ये मेघगानमिति काव्यग्रन्थे उपमानां नव्यता डॉ सङ्गीता मण्डल |
117-119 | Sanskrit |
| 100 | राष्ट्रभृत् होम: एक अध्ययन। शुभमकुमारपाण्डेय |
113-116 | Sanskrit |
| 101 | द्वैतदर्शने प्रामाणिकप्रतियोगिकत्वं मुनित्रयसम्मतम् कृष्णाचार्य पुरोहितः |
108-112 | Sanskrit |
| 102 | लघुत्रय्यां बृहत्त्रय्यां गुणपरिमानविचारसमीक्षणम् Sanchita Chakraborty |
105-107 | Sanskrit |
| 103 | प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा में नारी महिमा मनोज कुमार शुक्ल, तरुण कुमार शर्मा |
97-100 | Sanskrit |
| 104 | भारतविजयनाटके धर्मशास्त्रीयमूल्यम् अक्षयकुमाररायः |
89-91 | Sanskrit |
| 105 | जनजातीयानामुत्थाने आदिवासिमहापुरुषस्य श्रीरामेश्वरस्य शैक्षिकमाध्यात्मिकयोगदानम् कुमारी शीतला, डॉ.जि.नरसिम्हुलु |
84-88 | Sanskrit |
| 106 | विदग्धमाधवम् नाटकस्य काव्यशास्त्रीयमध्ययनम् सुनन्दा दे |
77-83 | Sanskrit |
| 107 | विवाहविधिः Dr. Markanda Nayak |
68-70 | Sanskrit |
| 108 | काण्वशतपथब्राह्मणे निरूपितस्य अग्न्याधेयस्य कालवैविध्यपरिशीलनम् एच वी अमरनाथ |
64-67 | Sanskrit |
| 109 | ‘अथातो ब्रह्मजिज्ञासा’ : ब्रह्मसूत्र का दार्शनिक आधार डॉ० दीपक कुमार पाठक |
55-59 | Sanskrit |
| 110 | भारतीय ज्ञान परम्परा में भूगर्भ विज्ञान डॉ प्रभात नारायण पाण्डेय |
52-54 | Sanskrit |
| 111 | अदर्शनं लोप: महाभाष्यदृष्ट्या तत्त्वमीमांसा Dr. Santosh Majhi |
50-51 | Sanskrit |
| 112 | वैदिककालीन अर्चना-परम्परा एवं वास्तु-विज्ञान डॉ. पुष्पेन्द्र जोशी |
46-49 | Sanskrit |
| 113 | ‘कविवररामलखनपाण्डेयस्य कृतीनां परिचयात्मकं विवेचनम्’ हरिश्चन्द्रः, प्रो.सनन्दनकुमारत्रिपाठी |
40-45 | Sanskrit |
| 114 | मृच्छकटिकाधारेण आदर्शः चरित्रं चारुदत्तः डॉ. हेमन्तकुमार नेपाल |
35-39 | Sanskrit |
| 115 | देवीपुराणे योगसम्मतेश्वरतत्त्वविमर्शः Snigdha Poddar |
32-34 | Sanskrit |
| 116 | शुक्लयजुर्वेदे स्वरभक्तिः आराध्युल रमेशः |
17-19 | Sanskrit |
| 117 | “पत्युर्नो यज्ञसंयोगे” इति सूत्रे निहितः स्त्रीस्थानविमर्शः – सामाजिकभाषाशास्त्रीयं विश्लेषणम्। Dr. Thahira P. |
08-09 | Sanskrit |
| 118 | विशिष्टाद्वैतसुधाकरो यामुनाचार्यः डॉ. सीहेच्. नागराजः |
399-401 | Sanskrit |
| 119 | भारतीयज्ञानपरम्पराधारेण व्यक्तित्वनिरूपणम् सङ्गीता मण्डल |
395-398 | Sanskrit |
| 120 | महाकवि-अवस्थीबच्चूलालप्रणीते अगतिकगतिकमित्यस्मिन् खण्डकाव्ये सामाजिकचिन्तनम् Dr. Jagadish Naskar, Dr. Subham Mukhopadhyay |
390-394 | Sanskrit |
| 121 | ज्ञानगतप्रत्यक्षत्वप्रयोजकविचारः लोकनाथ पण्डा |
384-389 | Sanskrit |
| 122 | विप्रतिषेधसूत्रस्थपरिभाषाद्वयविषये वैद्यनाथमतविमर्शः ए. आर्पितावर्षिणी |
379-383 | Sanskrit |
| 123 | आधुनिकसमाजे श्रीमद्भगवद्गीतायाः द्वादशोऽध्यायोक्तनिर्देशन-परामर्शतत्त्वानां प्रासङ्गिकता Sanjib Kumar Manna |
372-378 | Sanskrit |
| 124 | आनन्दमयाधिकरणे शाङ्करस्वामिनारायणभाष्ययोः दार्शनिकतुलनात्मकमीमांसा श्री गगनदीपः |
368-371 | Sanskrit |
| 125 | पाणिनीयव्याकरणे रणनीतिकप्रबन्धनस्य स्वरूपविश्लेषणम् (An Analysis of the Intrinsic Nature of Strategic Management in Pāṇinian Grammar) Gopal Krushna Dash , Sr. Prof. Anupama Prusty |
363-367 | Sanskrit |
| 126 | मन्त्रमौलिकार्थप्रकाशकं शब्दशास्त्रम् Shrutishikha Sahoo, Sr. Prof. Anupama Prusty |
357-362 | Sanskrit |
| 127 | संस्कृतकाव्यशास्त्राणां वा अलङ्कारशास्त्रस्य गतिः प्रवृत्तिश्च डा. सुजितमिश्र: |
352-356 | Sanskrit |
| 128 | साम्प्रतिकसमाजपरिप्रेक्ष्ये प्राचीनस्त्रीधर्मस्य स्वातन्त्र्यस्य च एकमध्ययनम् डॉ.पवित्रकुमारनन्दः |
349-351 | Sanskrit |
| 129 | अष्टमाध्यायनिरूपणम् पार्वणहोमविचारश्च Dr. C. Hariharan |
345-348 | Sanskrit |
| 130 | पाणिनीयव्याकरणे कर्तृस्वरूपविमर्शः डा. हेमन्त कुमार मुदुलिः |
343-344 | Sanskrit |
| 131 | प्राप्तप्रातिशाख्यग्रञ्चानां परिचयः अशोककुमारषडङ्गी , डॉ. पूर्णचन्द्रपाधि |
337-339 | Sanskrit |
| 132 | श्रीमद्भागवते नवधाभक्तिः डाँ. मिथुनकुमारशतपथी |
334-336 | Sanskrit |
| 133 | सिंहलविजयनाटके नाटकलक्षणसमन्वयः दीप्तिरेखा मिश्र |
326-328 | Sanskrit |
| 134 | अथर्ववेदे विविधकर्माणि Dr. Balabhadra Upadhyaya |
323-325 | Sanskrit |
| 135 | मातृभूमिचरितमहाकाव्ये वर्णविन्यासवक्रता द्वितीकृष्ण पाणिग्राही |
320-322 | Sanskrit |
| 136 | पाद्मसंहितानुसारं दशावतारमूर्तिकल्पनम् यस् . गोपालकृष्णः |
313-315 | Sanskrit |
| 137 | संसारोच्छेदो मुक्तिः मामिना साहुः |
308-312 | Sanskrit |
| 138 | वेदान्तशास्त्रे ब्रह्मस्वरूपम् एकम् अध्ययनम् मधुमिता गुच्छाइत् |
300-305 | Sanskrit |
| 139 | वराहपुराणे वर्णितं व्रताः उत्सवाश्च : भारतीयलोकसंस्कृतिः सन्दर्भे रणजित् बाग्दी, डॉ. हरीशदासः |
297-299 | Sanskrit |
| 140 | रुचिकराणि भोज्यपदार्थानि Dr. T. Venkateswarlu |
293-296 | Sanskrit |
| 141 | उपनिषत्सु मुख्यब्रह्मोपसनाविचारविमर्शः Dr. Santu Kumar Pan |
288-292 | Sanskrit |
| 142 | उपनिषद्वाङ्मये राष्ट्रस्य महत्त्वम् Dr. M. Dattatraya Sharma |
285-287 | Sanskrit |
| 143 | दूतकाव्यपरम्परायां जीमूतदूतम् दुर्गाशङ्करपण्डा |
282-284 | Sanskrit |
| 144 | उपनिषदां दार्शनिकमहत्त्वम् (उपनिषदां स्वरूपम्, विषयः, संख्या, दर्शनम् च) N.Aravindhan |
279-281 | Sanskrit |
| 145 | कालिदासरूपकेषु प्रेमिक-प्रेमिकयोः चरितविमर्शः गौराङ्ग साउ |
272-278 | Sanskrit |
| 146 | योगदर्शने आध्यात्मिक भक्तियोगाश्च डा. सुप्रिया वेरा |
263-266 | Sanskrit |
| 147 | विशिष्टाद्वैतवेदान्तानुसारं गीतायामात्मतत्त्वविचारः Dr. Markanda Nayak |
259-262 | Sanskrit |
| 148 | वैदिक कालीन भारत में गणतंत्र व्यवस्था के तत्व : एक ऐतिहासिक-दार्शनिक अनुशीलन डॉ० दीपक कुमार पाठक |
251-254 | Sanskrit |
| 149 | रामायणे वर्णिता पाककला सन्दीपन रायः |
247-250 | Sanskrit |
| 150 | “भाषाशिक्षणे सूचनासंचारप्रौद्योगिक्यनुप्रयोगे समस्याः समाधानञ्च” मनोज कुमार पांडेयः, डाँ. शिवदत्त आर्यः |
224-229 | Sanskrit |
