घुमंतु जनजाति – बंजारा समुदाय का लोक-साहित्य Post navigation “पत्युर्नो यज्ञसंयोगे” इति सूत्रे निहितः स्त्रीस्थानविमर्शः – सामाजिकभाषाशास्त्रीयं विश्लेषणम्।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पातंजल योगसूत्र मे वर्णित यम- नियम की नैतिक मूल्यों में उपयोगिता