द्वैत से अद्वैत तक – २१वीं सदी में नैतिक सापेक्षवाद के प्रतिकार के रूप में शंकराचार्य की दृष्टि Post navigation न्यायदर्शने आत्मतत्त्वविचारःअयनांशतत्त्वविवेकानुसारं अयनांशस्वरूपम्