| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | A Works On mudrᾱrᾱkşasa of Analytical Research Kamalini Panda |
01-06 | English |
| 2 | प्राकतभाषायाः वंशवृक्षः राजन |
07-10 | Sanskrit |
| 3 | मानसिकस्वास्थ्याय योगस्य भूमिका बि.ममता |
11-13 | Sanskrit |
| 4 | Difference Beteen Western Philosophy and Indian Philosophy A Analytical Study Allolika Gan |
14-17 | English |
| 5 | साहित्य-अकादेमी-युवपुरस्कारेण पुरस्कृतसंस्कृतकाव्यानां परिचयः Araveeti R V Nagendra Kumar |
18-21 | Sanskrit |
| 6 | अथर्ववेदे पञ्चमहाभूततत्त्वानां विवेचनम् Kishan Lal Joshi |
22-23 | Sanskrit |
| 7 | आनन्दतीर्थकृत-यमकभारतटीकायामेकाक्षरयमकालंकारः-एकमध्ययनम् चित्तरञ्जन राज |
24-26 | Sanskrit |
| 8 | ऋतुसंहारे प्रथमसर्गस्थ लट्लकारपदविमर्श: Srimandir Sahoo |
27-30 | Sanskrit |
| 9 | पारस्करगृह्यसूत्रोक्तस्य गर्भाधानसंस्कारस्य परिशीलनम् विद्वान्. के.एस्.अरुणकुमार् |
31-34 | Sanskrit |
| 10 | महाकवि भवभूति के नाटकों में परोपकार की भावना सरोज महानन्द |
35-37 | Hindi |
| 11 | पारस्करगृह्यसूत्रोक्तस्य पुंसवनसंस्कारस्य परिशीलनम् विद्वान्. के.एस्.अरुणकुमार् |
38-41 | Sanskrit |
| 12 | श्रीमद्भगवद्गीतायां नवधाभक्तितत्त्वविमर्श: डॉ. कृष्णचन्द्रकविः |
42-44 | Sanskrit |
| 13 | श्रीमद्भगवद्गीतायां प्रपञ्चमिथ्यात्वविचारः Dr. Radhaknata Panda |
45-47 | Sanskrit |
| 14 | गहनः कर्मणः गतिः डॉ. श्रद्धाञ्जलिमहापात्र |
48-49 | Sanskrit |
| 15 | चाणक्यदृष्ट्या शिक्षातत्त्वानि Dr. M. Sridhar Rajan |
50-52 | Sanskrit |
| 16 | श्रीमद्भगवद्गीता में ईश्वरवाद डॉ गौरी भटनागर |
53-55 | Sanskrit |
| 17 | शिक्षाधिकारे सर्वशिक्षाभियान-साक्षरताभियानयोः प्रभावः पलाश मण्डलः |
56-59 | Sanskrit |
| 18 | Ancient Indian knowledge of Environmental Awareness Seema rani Rath |
60-62 | English |
| 19 | आर्य संस्कृति में कर्म सिद्धान्त डॉ गौरी भटनागर |
63-65 | Sanskrit |
| 20 | पाणिनीयपरम्परायां सूत्रं तद्विभाजनं च डाँ. शशिभूषणमिश्रः |
66-70 | Sanskrit |
| 21 | श्राद्ध में शास्त्रीय विधि एवं विधान शुभम शर्मा |
71-73 | Hindi |
| 22 | The Savara Tribes: Plays a major role in the Sanskrit literature and Indian Culture Dr. Niranjan Sabar |
74-77 | English |
| 23 | पुराणानां प्रामाणिकता भाषा शैली च Dr.Sukanya Senapati |
78-81 | Sanskrit |
| 24 | योगदर्शन में योग का स्वरुप शुभम शर्मा |
82-84 | Hindi |
| 25 | भाषा संगीतक और भारतीय रंगमंच पूजा दीक्षित |
85-90 | Hindi |
| 26 | शास्त्रेषु परिवेशप्रदूषणस्यावधारणा: किशनलाल जोशी |
91-95 | Sanskrit |
| 27 | भारतीय लोकनाट्य में लीला नाटकों की भूमिका पूजा दीक्षित |
96-100 | Hindi |
| 28 | रामायण कालीन समाज, एक विवेचना डॉ. (श्रीमती) सुषमा शुक्ला |
101-105 | Hindi |
| 29 | दर्भरहस्यम् Dr. Niranjan Mishra |
106-110 | Sanskrit |
| 30 | वेदों में नारी की स्थिति, एक विश्लेषण डॉ. (श्रीमती) सुषमा शुक्ला |
111-113 | Hindi |
| 31 | श्री शङ्कर भगवत्पादानां भाष्येतर साहित्ये योगविषयक प्रस्तावः डा. नारायण हेगडे |
114-116 | Sanskrit |
| 32 | व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वम् Deviprasad Mishra |
117-120 | Sanskrit |
| 33 | पुराणान्तरेषु प्रतिपादतं सृष्टि-प्रक्रियायाः उपेन्द्र दुबे |
121-125 | Sanskrit |
| 34 | सांख्यदर्शनस्य प्रकृतिपुरुषयोः वैशिष्टयम् उर्मिला देवी |
126-129 | Sanskrit |
| 35 | थाईलैंड के त्योहार डॉ. पद्मा सवांगश्री, डॉ. सेकसन सवांगश्री |
130-137 | Hindi |
| 36 | मात्रितरभाषोपलब्धौ उपयुज्यमानौ प्रत्यक्षानुवादविधी Bikash Das |
138-142 | Sanskrit |
| 37 | ताजिकशास्त्रदृष्ट्या विविधरोगाणां विमर्शः हर्ष द्विवेदी |
143-147 | Sanskrit |
| 38 | पाशुपतदर्शनस्य महत्त्वम् डॉ. मोहन लाल शर्मा |
148-150 | Sanskrit |
| 39 | रामायणकल्पवृक्षे दाक्षिणात्यसम्प्रदायाः डॉ. सीहेच्. नागराजु |
151-153 | Sanskrit |
| 40 | पाणिनीयव्याकरणे संज्ञाशब्दरहस्यम् Dr. Giridhari Panda |
154-157 | Sanskrit |
| 41 | सांख्यदर्शन के अनुसार बुद्धि के सात्त्विक रूप डॉ.शम्भू कुमार तिवारी |
158-160 | Sanskrit |
| 42 | भारतीय मन का यूरोपीय दर्शन : ‘सफेद रातें और हवा’ डॉ. विपुल कुमार |
161-165 | Hindi |
| 43 | पञ्चमनिमित्तप्रतिपादनम्, तत्खण्डनञ्च Dr. T.S.R. Narayanan |
166-168 | Sanskrit |
| 44 | काण्वसंहिताभाष्यकारेषु अनन्ताचार्यस्य भाष्यवैभवम् शिवशङ्करहोता |
169-174 | Sanskrit |
| 45 | Historical background, philosophical and socio-cultural linkages to human rights Rajasree Roy |
175-179 | English |
| 46 | पञ्चतन्त्रे व्यवहाररीतिः Lanka S K Mallikarjuna Prasad |
180-182 | Sanskrit |
| 47 | श्रीमद्भागवत विष्णुपुराणयोः शापवृत्तान्तानामध्ययनम् M. Sumithra |
183-185 | Sanskrit |
| 48 | गंगा की पौराणिकता पुरन चंद कापड़ी |
186-190 | Hindi |
| 49 | Critical Astrological Evaluation of Epidemic Diseases WSR to Corona Pandemic Mrs. Y.V. Rajyalakshmi Rao |
191-198 | English |
| 50 | कालिदासविरचित कुमारसम्भवमहाकाव्ये कविताकला के. शेखर् |
199-201 | Sanskrit |
| 51 | विशिष्टाद्वैतवेदान्तानुसारेण श्रीमद्भगवद्गीतास्थयोगाभ्यासविधिविषयकाध्यायस्य स्वरूपम् डा. सुदर्शनन् एस् |
202-203 | Sanskrit |
| 52 | न्यायदर्शने ईश्वरवादः डा. रामचन्द्रशर्मा |
204-207 | Sanskrit |
| 53 | शिवसंहितास्वरयोगग्रन्थयोः समीक्षनम् K.C.S. Lokeshwar, Dr. (Smt.) D. Jyothi |
208-209 | Sanskrit |
| 54 | समकालीन संदर्भ में ‘अंधेर नगरी’ की प्रासंगिकता डॉ. परषोत्तम कुमार |
210-212 | Hindi |
| 55 | पाणिनीयगणपाठस्य ऐतिह्यं महत्त्वम् डा.यशस्वी |
213-214 | Sanskrit |
| 56 | संस्कृतभाषायां नव व्याकरणानां वैशिष्ट्यम् Dr. P. Swapna Haindavee |
215-219 | Sanskrit |
| 57 | अहिर्बुध्न्यसंहितायां सुदर्शनवैभवम् Dr. P.T.G. Bharatasekharacharyulu |
220-222 | Sanskrit |
| 58 | आर्यभटमतानुसारेण ब्रह्ममानानां विमर्शः डॉ.श्रीनिवासपण्डा |
223-225 | Sanskrit |
| 59 | काव्यप्रकाशे दीपकालङ्कारविमर्शः प्रोफेसर(डा.) सत्यनारायण आचार्यः |
226-227 | Sanskrit |
| 60 | महिमभट्टस्य अनुमितिपक्षे शङ्कुकस्य रसानुमितिवादस्य प्रभावः डा. पि.के . दीपक् राज् |
228-230 | Sanskrit |
| 61 | महाकविकालिदासकृत-कुमारसम्भवमहाकाव्ये पार्वत्याः तपनिष्ठायाः वर्णनम् डॉ. नीलमाधवप्रधानः |
231-233 | Sanskrit |
| 62 | साम्प्रदायिकता का प्रश्न और गीतांजलि श्री की कहानियाँ इन्द्र कुमार यादव |
234-236 | Hindi |
| 63 | बिहारी के रसात्मक दोहों का चित्रण : नारी सन्दर्भ में डॉ. अंशु सिंह झरवाल |
237-243 | Hindi |
