अष्टांगयोगान्तर्गत यमयोग की समीक्षा ( श्रीपांचरात्रागमांतर्गत अगस्त्यसंहिता के माध्यम से) Post navigation शंकराचार्य और पर्यावरण चेतना – सतत जीवन के लिए अद्वैत का पुनर्व्याख्यानयदागमपरिभाषार्थः, आगमलक्षणञ्च – सुखबोधिनीमतम्