| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | दिनकर-काव्य में मिथकीय तत्त्व डॉ. दीपक त्रिपाठी |
01-04 | Hindi |
| 2 | दयानंद एंग्लो-वैदिक (DAV) आंदोलन: भारतीय पुनर्जागरण और आधुनिक शिक्षा में योगदान डा. सुमित्रा देवी |
05-08 | Hindi |
| 3 | प्राथमिक स्तर के पुरुष शिक्षकों के समायोजन का उनके शिक्षण दक्षता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन डॉ. विमल कुमार शुक्ल |
09-14 | Hindi |
| 4 | विद्यार्थियों में मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में योग की भूमिका : एक समीक्षात्मक अध्ययन डॉ. विक्रम सिंह कण्डारी |
15-18 | Hindi |
| 5 | समकालीनशिक्षायाम् अवधानकलायाः शैक्षिकोपादेयता (The Educational Relevance of Avadhana Kala in Contemporary Education) Ganesh Acharya |
19-24 | Sanskrit |
| 6 | जैनरामायणे पात्रवैशिष्ट्यम् बि. ए. विनायकः स्वामि , प्रो. वि. गिरीश्चन्द्रः |
25-28 | Sanskrit |
| 7 | व्याकरणमहाभाष्ये सूक्तिः मानसी सरदार |
29-33 | Sanskrit |
| 8 | “हिन्दी भाषा तथा साहित्य में खड़ीबोली का क्रमिक विकास” वसीउर रहमान खाँ |
34-36 | Hindi |
| 9 | शुभशकुनविमर्शः डा. आशुतोष कुमार झा |
37-39 | Sanskrit |
| 10 | वर्णाश्रमधार्मानां वैशिष्ठ्यम् Dr. Valluri Thriambakam |
40-42 | Sanskrit |
| 11 | “उपनिषद्वाङ्मये गुरुशिष्यसम्बन्धस्य तात्त्विकस्वरूपविमर्शः” Dr. Damodar Mohanta |
43-46 | Sanskrit |
| 12 | नारदपुराणोक्तनित्यकर्मणां शास्त्रीयविमर्शः नूक हेमसुन्दर रावु |
47-51 | Sanskrit |
| 13 | प्रौढमनोरमायाः मङ्गलश्लोकविमर्शः नारायण-चन्द्रः मेट्याः |
52-55 | Sanskrit |
| 14 | 21वीं सदी के दलित आत्मकथाओं में सामाजिक और शैक्षिक यथार्थ का आलोचनात्मक अध्ययन सुशील कुमार सिंह , अप्पू कुमार |
56-60 | Hindi |
| 15 | आधुनिक हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा का योगदान शांता त्रिपाठी |
61-63 | Hindi |
| 16 | दर्पणप्रदीपटीकयोः मम्मटोक्तकाव्यकारणमविमर्शः रफिक होसेन |
64-67 | Sanskrit |
| 17 | डॉ.कालानाथ शास्त्री का रेडियो रूपक – धर्मस्य तत्वम निगुहायाम लतिका, डॉ. (प्रो.) संतोष कुमार सोरठा |
68-70 | Hindi |
| 18 | स्त्रीचेतना तथा सामाजिकप्रतिबिम्बः गौरीधर्मपाल-रमाचौधुरीयोः तुलनात्मकमध्ययनम् तृषा पाल |
71-75 | Sanskrit |
| 19 | चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता में चिकित्सा विज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन गजानंद सेन , पुष्पेंद्र सिंह |
76-78 | Hindi |
| 20 | अद्वैतवेदान्त में ज्ञान और आत्मबोध की अवधारणा, उपनिषद्, भगवद्गीता एवं शंकरभाष्य के तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन अंजू |
79-82 | Hindi |
| 21 | बुन्देली काव्य में लोकजीवन और सामाजिक परिवर्तन का समाजशास्त्रीय विश्लेषण डॉ. सूर्यकान्त त्रिपाठी |
83-86 | Hindi |
| 22 | महाकवि कालिदास की कृतियों में शिक्षा-व्यवस्था एवं उसकी समकालीन उपादेयता (राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के विशेष परिप्रेक्ष्य में) डॉ० विष्वक्सेन दत्त द्विवेदी |
87-93 | Hindi |
| 23 | शङ्कराचार्याणां कृतिषु नैतिकतत्वानि यासं. मणिकण्ठ सायि. |
94-101 | Sanskrit |
| 24 | आधुनिक समाज में वाल्मीकि रामायण : मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता एवं जीवन-दृष्टि का पुनर्पाठ आचार्य राहुल पन्त , डॉ नीरज कुमार जोशी |
102-106 | Hindi |
| 25 | “वैदिक-ज्योतिषसाहित्याधारेण फलादेशविषये नक्षत्रविमर्श:” विशिष्टाचार्य आशुतोष शर्मा, प्रो. विनोदकुमारशर्मा |
107-112 | Sanskrit |
| 26 | रामायण और श्रीरामानुकीर्तनम् महाकाव्य में साम्यवृत्त विवेचन की समीक्षा हैपी शर्मा |
113-116 | Hindi |
| 27 | पण्डितराजजगन्नाथस्य साहित्यवैभवम् — एकं समालोचनात्मकमध्ययनम् Dr. Sindhu T.S |
117-119 | Sanskrit |
| 28 | भारतीय श्रवण बाधित बच्चों में पठन-लेखन के प्रमुख परिणाम, बाधाएँ और प्रभावी शिक्षण पद्धतियाँ: एक संरचित साहित्य समीक्षा श्री अम्बिकेश |
120-126 | Hindi |
| 29 | भारतीयज्ञानपरम्परायां वास्तुशास्त्रम् ज्योत्सनाराठौर:, डॉ. दीपकवशिष्ठ: |
127-129 | Sanskrit |
| 30 | मनस्तापप्रबन्धने योगस्य महत्त्वम् मनीषकुमारः, सविता तोकबिपी |
130-132 | Sanskrit |
| 31 | संस्कृतनीतिसाहित्ये शैक्षिकतत्वानामनुशीलनम् नीता |
133-136 | Sanskrit |
