| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | “भाषाशिक्षणे सूचनासंचारप्रौद्योगिक्यनुप्रयोगे समस्याः समाधानञ्च” मनोज कुमार पांडेयः, डाँ. शिवदत्त आर्यः |
224-229 | Sanskrit |
| 2 | संस्कृतसाहित्ये छन्दोविचारः, छन्दस्सु अनुष्टुपछन्द: Dr.Harikrishna Kondapalli |
222-223 | Sanskrit |
| 3 | प्राचीन भारतीय राजव्यवस्था: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में Dr. Darin Sarkar |
218-221 | Sanskrit |
| 4 | महाभाष्यकारस्य पतञ्जलेर्व्याख्यानपद्धतिः गणेशमहतो, सदानन्दः |
209-212 | Sanskrit |
| 5 | पातञ्जल महाभाष्यटीका सूक्तिरत्नाकर का ऊह सम्बधित परिप्रेक्ष्य संजीव कुमार, प्रोफेसर ओमनाथ बिमली |
192-198 | Sanskrit |
| 6 | वेणीसंहारे सुवदनाचरित्रचित्रणम् सिद्धार्थवैराग्यः |
188-191 | Sanskrit |
| 7 | शाङ्कराचार्य-शैवदर्शनयोः अद्वैतवादस्य विश्लेषणात्मकमध्ययनम् अशोका रुइदास |
184-187 | Sanskrit |
| 8 | चक्रपाणिटीकानुसारं चरकसंहितायाः सूत्रस्थानस्य प्रथमचत्वारोऽध्यायानां समीक्षा डा.तरुण कुमार माइति |
170-173 | Sanskrit |
| 9 | भारतीयज्ञानपरम्परायां संस्कृतभाषाविज्ञानस्य तथा व्याकरणस्य योगदानम्। डा. मिलनमाजी |
165-169 | Sanskrit |
| 10 | अजेर्व्यघञपोः सूत्रविमर्शः श्री शिवप्रसाद शुक्लः |
126-129 | Sanskrit |
| 11 | गीतशङ्कर-गीतसुन्दरकाव्ययोः वसन्तवर्णनम् । संघमित्रा जेना |
123-125 | Sanskrit |
| 12 | श्रीतुलसीमहाकाव्ये धर्मशास्त्रवैज्ञानिकांशाः राकेशपरिडा |
121-122 | Sanskrit |
| 13 | संस्कृतवाङ्मयसहितश्रीमद्भागवताग्निमहापुराणयोः मोक्षप्राप्तये अष्टसिद्धीनामनुशीलनम् खेमराजः |
104-107 | Sanskrit |
| 14 | भट्टलोलट्ट–भट्टनायक–शंकुक–अभिनवगुप्त : रससिद्धान्तस्य सौंदर्यशास्त्रीयम् अनुशीलनम् डॉ० प्रीति सिरौटीय |
97-100 | Sanskrit |
| 15 | अष्टावक्रगीतायां निहितसामाजिकतत्त्वानि (A Study of Social Elements in Ashtavakragita) Shankar datta Joshi |
85-87 | Sanskrit |
| 16 | संस्कृतबङ्गभाषयोः नैसर्गिकं सान्निहित्यम् कौशिकहालदारः |
82-84 | Sanskrit |
| 17 | रत्नपालचरितस्य परिचयः फूलचन्द: |
73-76 | Sanskrit |
| 18 | द्विसन्धान महाकाव्य और रामायण में साम्यवृत विवेचन कुलभूषण शारदा |
70-72 | Sanskrit |
| 19 | पाणिनिजैनेन्द्रव्याकरणयोः सुप्प्रत्ययानां तुलनात्मकमध्ययनम् हरिशंकरकुमारः |
56-60 | Sanskrit |
| 20 | पाणिनिजैनेन्द्रव्याकरणयोः सनाद्यन्तप्रत्ययानां तुलनात्मकमध्ययनम् दयाराम गौतमः |
48-50 | Sanskrit |
| 21 | भास्करोक्तपर्वसाधनम् डा. राघवेन्द्रः |
37-39 | Sanskrit |
| 22 | अस्माकं समाजः भगवत्पादाश्च सुशान्तमण्डलः |
33-36 | Sanskrit |
| 23 | प्राचीनभारते परिवेशभारसाम्यार्थभूमिसंरक्षणं – कौटिलीयेऽर्थशास्त्रे सन्तोष मण्डलः |
30-32 | Sanskrit |
| 24 | वाजसनेयिप्रातिशाख्यानुसारेणोच्चारणस्थानानि सिद्धान्तषडङ्गी |
19-22 | Sanskrit |
| 25 | जीवनदर्शनशास्त्रयोरन्तःसम्बन्धः प्रो. जवाहरलाल |
16-18 | Sanskrit |
| 26 | पञ्चाननतर्करत्नविरचिते अमरमङ्गलम् इति नाटके नाटकलक्षण-विमर्शः अजयतन्तुवायः |
12-15 | Sanskrit |
| 27 | आचार्यशङ्कस्य परमाणुकारणतावादखण्डनयुक्तेः विमर्शः Kabery Hossain |
08-11 | Sanskrit |
| 28 | शाङ्करभाष्यानुसारेण कर्मानुस्मृतिशब्दविध्यधिकरणतात्पर्यालोचनम् कार्त्तिक मण्डलः |
06-07 | Sanskrit |
| 29 | शैवागमप्रोक्त-सपर्याभेद-परामर्शः Dr. G. Suresh |
190-193 | Sanskrit |
| 30 | सामवेदस्य शाखापरम्परायाः अद्यतनस्थितिः गानपद्धतीनां च समीक्षात्मकमध्ययनम् (A Critical Study on the Current Status of Samavedic Shakha Traditions and Singing Methods) लीलाधर शर्मा, प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती |
187-189 | Sanskrit |
| 31 | “भोजराजस्य ‘सरस्वतीकण्ठाभरणे’ सौंदर्यशस्त्रीयं विवेचनम्” डॉ० प्रीति सिरौटीय |
176-179 | Sanskrit |
| 32 | हर्षदेवमाधवस्य बुद्धस्यभिक्षापात्रे काव्ये पर्यावरणचिन्तनम् जगदीशनन्दः |
170-172 | Sanskrit |
| 33 | श्रीमथुरानाथशास्त्रिणः प्रायोगिकशैलीनां विवेचनम् राजलक्ष्मी गौड |
167-169 | Sanskrit |
| 34 | आचार्यशान्तिभिक्षुशास्त्रिप्रणीतस्य बुद्धविजयकाव्यस्य दार्शनिक-सामाजिक-साहित्यिकादिमूल्याङ्कनम् प्रफुल्लकुमाररावतः, डा. प्रफुल्लगडपालः |
162-166 | Sanskrit |
| 35 | ललितविस्तरसूत्रस्य सांस्कृतिक–ऐतिहासिक-महत्त्वम् सन्दीपकुमारः, डा टी महेन्द्रः |
157-161 | Sanskrit |
| 36 | कादम्बिनी ग्रंथानुसार उल्काविचार का समीक्षात्मक अध्ययन डा.रतीश कुमार झा |
154-156 | Sanskrit |
| 37 | काव्यस्याक्षरिकार्थस्य विश्लेषणात्मकमध्ययनम् डॉ. रमेशमालाकारः |
146-149 | Sanskrit |
| 38 | दूरस्थशिक्षाकार्यक्रमः (Distance Education programme) Dr.Venkatrao Jagarlamudi |
136-139 | Sanskrit |
| 39 | वैदिकसाहित्ये अष्टविधविवाहविमर्शः अनुज कुमारः |
133-135 | Sanskrit |
| 40 | व्याप्तिपञ्चकम् Srikanth K |
130-132 | Sanskrit |
| 41 | सिद्धान्तशिरोमणिग्रन्थानुसारेण ग्रहणे स्पर्शादीनां पञ्चानामवयवानां साधनम् गिरीशभट्टः बि, दिवाकरशर्मा |
120-125 | Sanskrit |
| 42 | भारतीयज्ञानपरम्परानुसारेण संहिता-ग्रन्थोक्त: वृष्टिविचार: डॉ.ख्यालानन्दः |
116-119 | Sanskrit |
| 43 | अधिरामायणं पितृभक्तिः प्रज्ञा दूबे |
113-115 | Sanskrit |
| 44 | भामत्यनुसारं मरुमरीचिग्रन्थभागमाश्रित्य अध्यासविषयकम् एकं विश्लेषणम् प्रवीणः एम्. सज्जनः |
109-112 | Sanskrit |
| 45 | संस्कृत हा ज्ञानाचा स्रोत आहे Mrs Hemlata Dhokte ( Kshirsagar) |
107-108 | Sanskrit |
| 46 | ब्रह्मसूत्र उपनिबद्धस्य जन्माद्यधिकरणस्य समीक्षणम् रामचन्द्रोऽर्यालः |
104-106 | Sanskrit |
| 47 | वेदेषु राष्ट्रियभावना Subhasmita Nayak |
96-99 | Sanskrit |
| 48 | साम्प्रतिके अथर्ववेदीयचिकित्सापद्धतिनाम् उपादेयता मोहन लाल वर्मा |
90-92 | Sanskrit |
| 49 | “वर्तमानसन्दर्भे साहित्यस्य प्रासङ्गिकता” डॉ बुद्धिबल्लभदेवराड़ी |
88-89 | Sanskrit |
| 50 | सप्रयोजनं व्याकरणाध्ययनम् श्री चन्द्रमौलि कल्याणः |
85-87 | Sanskrit |
| 51 | न्यायवैशोषिक दर्शने सृष्टितत्त्वम् तन्मय सरकारः |
74-76 | Sanskrit |
| 52 | पुराणेषु व्रतपर्वोत्सवादीनां माहात्म्यानुशीलनम् डॉ.कृष्णचन्द्रकविः |
68-70 | Sanskrit |
| 53 | दिक्परिज्ञानप्रकारविमर्शः Krishnananda B.M. |
65-67 | Sanskrit |
| 54 | अच्युतशतके विशिष्टाद्वैतवेदान्ततत्त्वानां समीक्षणम् स. वासुदेवः, डॉ. सुजाताराघवन् |
61-64 | Sanskrit |
| 55 | वेदान्तपरम्परायां अचिन्त्यभेदाभेदवादे गोविन्दभाष्यस्य महत्वम् Dr. Apurba Gorai |
58-60 | Sanskrit |
| 56 | शैवमतं तस्य च पाशुपतसम्प्रदायः चञ्चल |
54-57 | Sanskrit |
| 57 | कविकर्णरसायनकाव्ये रीतयः गुणाश्च Eslavath Saritha |
51-53 | Sanskrit |
| 58 | चन्द्रिकायां भोक्त्रधिकरणम् डा.एल्. सुधीन्द्राचार्यः |
48-50 | Sanskrit |
| 59 | काश्यपसंहितानुसारं बालविकासः सागरिकासरकारः |
45-47 | Sanskrit |
| 60 | शरीरलक्षणम् डा. ए . टि. बद्रि |
42-44 | Sanskrit |
| 61 | ऋग्वर्णक्रमलक्षणे वर्णक्रमविचक्षणः। डॉ. भारती बालटे |
26-28 | Sanskrit |
| 62 | शाब्दिकदृष्ट्या जगद्व्यवहारे शब्दब्रह्म सौरभ राउतः |
22-25 | Sanskrit |
| 63 | प्राचीनभारते प्रोद्योगिकी शिक्षा डॉ. हृषिकेशसाहुः |
19-21 | Sanskrit |
| 64 | संस्कृतच्छात्राणां आत्मविकासे पतञ्जलियोगदर्शनस्य प्रभावः Ninuaa Ram |
16-18 | Sanskrit |
| 65 | “काव्यप्रकाशद्वितीयोल्लासस्थित – वाच्य-लक्ष्य-व्यङ्ग्यार्थानां उदाहरणश्लोकार्थ निरूपणम्” V. Sarveswararao, Dr.Sujatha Ragavan |
01-03 | Sanskrit |
| 66 | वैखानसागमोक्तरीत्या शाकफलविधिविवरणम् Dr. G. Suresh |
192-194 | Sanskrit |
| 67 | सिद्धार्थचरितमहाकाव्ये छन्दस्समीक्षणम् स्वर्णाली पात्र |
188-191 | Sanskrit |
| 68 | साम्प्रतिककाले ज्योतिषशास्त्रस्य ज्योतिषतत्त्वप्रकाशग्रन्थस्य च प्रासङ्गिकता अविनाशकुमारः |
185-187 | Sanskrit |
| 69 | अद्वैतवेदान्तदिशा जीवस्वरूपप्रतिपादनम् Dr.Monojit Mukherjee |
182-184 | Sanskrit |
| 70 | रत्नपालचरितेअलङ्काराणां प्रयोगः फूलचन्द: |
173-178 | Sanskrit |
| 71 | न्यायवैशेषिकनये, अद्वैतनये च अन्यथासिद्धिविषयकम् एकं तात्त्विकमध्ययनम् प्रवीणः एम्. सज्जनः |
163-167 | Sanskrit |
| 72 | यजुर्वेदे कृष्णशुक्लयोः वैशिष्ट्यम् डॉ मनीषभारद्वाजः |
160-162 | Sanskrit |
| 73 | रोगनिर्धारणतत्वमीमांसा डा. नीरजभारद्वाजः |
157-159 | Sanskrit |
| 74 | मनुस्मृतिदृष्ट्या आध्यात्मचेतनाविचारे अन्तरात्मन आह्वानम् डॉ. मनोजकुमारस्वाइँ |
151-153 | Sanskrit |
| 75 | कालिदासीयं व्यक्तित्वचिन्तनम् सागरिकासरकारः |
147-150 | Sanskrit |
| 76 | “काव्यप्रकाशप्रथमोल्लासस्थित-उत्तम-मध्यम-अधम-काव्यानाम् उदाहरणार्थनिरूपणम्” V. Sarveswararao, Dr.Sujatha Ragavan |
140-142 | Sanskrit |
| 77 | आचार्य श्रीवनमालिविश्वालस्य काव्येषु सांस्कृतिक परिशीलनम् ममता महान्त |
137-139 | Sanskrit |
| 78 | मनोविज्ञानम् गणेश चन्द्र पण्डा |
133-136 | Sanskrit |
| 79 | वैदिकवाङ्मये पर्यावरणस्थितिः डॉ. हृषिकेशसाहुः |
130-132 | Sanskrit |
| 80 | विशिष्टाद्वैतवेदान्तेप्रपत्तियोगस्वरूपम् Uppara Krishnaveni |
112-114 | Sanskrit |
| 81 | आधुनिकसंस्कृतसाहित्ये प्रमुखपद्यकाव्यानां मीमांसा अमिता शर्मा |
107-111 | Sanskrit |
| 82 | अभिलषितार्थचिन्तामणौ गमकाः परीक्षित् बि वशिष्ठः |
97-98 | Sanskrit |
| 83 | अवधीभाषाया अकारान्तवर्तमानकालिकक्रियायाः धातुमूलकत्वविचारः रोहितकुमारद्विवेदी |
94-96 | Sanskrit |
| 84 | नैषधीयचरितमहाकाव्ये वर्णितानि आयुधानि पूजा नायकः |
91-93 | Sanskrit |
| 85 | वेदेषु पर्यावरणसमस्यायाः समाधानानि सारथी हेमव्रम |
88-90 | Sanskrit |
| 86 | भारतीयज्ञानपरम्परायां न्यायशास्त्रस्य वैशिष्ट्यम् शालिनी कुमारी |
71-73 | Sanskrit |
| 87 | अचिन्त्यभेदाभेददर्शनस्य सिद्धान्तसारः अमित कुमार धर दुबे |
62-64 | Sanskrit |
| 88 | शरणागतिदीपिकास्तोत्रे विशिष्टाद्वैतवेदान्तानुभवः स. वासुदेवः, डॉ. सुजाताराघवन् |
56-57 | Sanskrit |
| 89 | शिक्षाशास्त्रे विविधतत्त्वानि (Diverse Elements of Pedagogy) Dr. G. Amareswara Kumar |
52-55 | Sanskrit |
| 90 | भारतीयज्ञानपरम्परायां संरचनावादतत्वानामध्ययनम् (A Study of Structuralist Elements in the Indian Knowledge Tradition) Dr. G. Amareswara Kumar |
49-51 | Sanskrit |
| 91 | संस्कृतानुरागीनां वक्तव्येषु संस्कृतस्य प्रथिति- लक्षणानां च विश्लेषणम् डॉ. प्रदीप कुमार मीणा |
45-48 | Sanskrit |
| 92 | विवाहे मङ्गलदोषविचारः दिवेश वेहेरा |
43-44 | Sanskrit |
| 93 | भैरवानन्दनाटके रसविचारः एकमध्ययनम् विनयकुमारवरः , प्रो॰ अजयकुमारमिश्रः |
24-27 | Sanskrit |
| 94 | अद्वैतवेदान्तदर्शने अनुमानप्रमाणम् Suman Das |
17-19 | Sanskrit |
| 95 | ‘विना गानं नाट्यं रागं न गच्छति’ : केषांचित् मञ्चाभिनीतानाम् अर्वाचीनसंस्कृतनाट्यानां परिप्रेक्ष्ये आलोचनम् Dr. Malay Debnath |
13-16 | Sanskrit |
| 96 | लोके समावर्तनसंस्कारस्य महत्त्वम्, तदावश्यकता च रो.वे. सत्यनारायणाचार्युलु |
07-12 | Sanskrit |
| 97 | गीतशङ्कर-गीतसुन्दरकाव्ययोः अलङ्कारविचारः संघमित्रा जेना |
264-266 | Sanskrit |
| 98 | ललितविस्तरसूत्रे बुद्धचरितवर्णनानुशीलनम् सन्दीपकुमारः |
255-259 | Sanskrit |
| 99 | श्रीमद्भगवद्गीतायाः सिद्धान्तानां शैक्षिकक्षेत्रे उपादेयता डा. नीरजभारद्वाजः |
250-251 | Sanskrit |
| 100 | श्रीरामचरितमहाकाव्ये उपाख्ये ‘अरविन्दरामायणे’ अङ्गीरसस्वरूपवर्णनम् मोहन लाल वर्मा |
243-246 | Sanskrit |
