| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | पुस्तकालय कार्यबल और डिजिटल कौशल विकास : वर्तमान आवश्यकताएँ और भविष्य की राह कु० शालू , डा.बसवराज एम.टी. |
01-04 | Hindi |
| 2 | साहित्य और समाज का सम्बन्ध डॉ. मथुरा इमलाल |
05-06 | Hindi |
| 3 | लोके समावर्तनसंस्कारस्य महत्त्वम्, तदावश्यकता च रो.वे. सत्यनारायणाचार्युलु |
07-12 | Sanskrit |
| 4 | ‘विना गानं नाट्यं रागं न गच्छति’ : केषांचित् मञ्चाभिनीतानाम् अर्वाचीनसंस्कृतनाट्यानां परिप्रेक्ष्ये आलोचनम् Dr. Malay Debnath |
13-16 | Sanskrit |
| 5 | अद्वैतवेदान्तदर्शने अनुमानप्रमाणम् Suman Das |
17-19 | Sanskrit |
| 6 | वेदों में आयुर्वेदिक चिकित्सा डॉ. पूजा कुमारी |
20-23 | Hindi |
| 7 | भैरवानन्दनाटके रसविचारः एकमध्ययनम् विनयकुमारवरः , प्रो॰ अजयकुमारमिश्रः |
24-27 | Sanskrit |
| 8 | दिव्यांगजनों की आर्थिक आत्म निर्भरता का विश्लेषणात्मक अध्ययन: दिव्यकला मेला के विशेष संदर्भ में श्री सुनील कुमार शिरपूरकर |
28-30 | Hindi |
| 9 | Influence of Brahmagupta on Bhaskara Ⅱ A Sripada Bhat , TVK Bala Hanuman |
31-34 | English |
| 10 | वैदिक व अवैदिक काल में शिक्षाशास्त्रियों के दर्शनशास्त्र का वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में तुलनात्मक अध्ययन मनीषा, डॉ. मनोज जोशी |
35-38 | Hindi |
| 11 | वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक परिवर्तन: जयपुर के मध्यम वर्गीय समाज का समाजशास्त्रीय अध्ययन Dr. Daya Shankar Sharma |
39-42 | Hindi |
| 12 | विवाहे मङ्गलदोषविचारः दिवेश वेहेरा |
43-44 | Sanskrit |
| 13 | संस्कृतानुरागीनां वक्तव्येषु संस्कृतस्य प्रथिति- लक्षणानां च विश्लेषणम् डॉ. प्रदीप कुमार मीणा |
45-48 | Sanskrit |
| 14 | भारतीयज्ञानपरम्परायां संरचनावादतत्वानामध्ययनम् (A Study of Structuralist Elements in the Indian Knowledge Tradition) Dr. G. Amareswara Kumar |
49-51 | Sanskrit |
| 15 | शिक्षाशास्त्रे विविधतत्त्वानि (Diverse Elements of Pedagogy) Dr. G. Amareswara Kumar |
52-55 | Sanskrit |
| 16 | शरणागतिदीपिकास्तोत्रे विशिष्टाद्वैतवेदान्तानुभवः स. वासुदेवः, डॉ. सुजाताराघवन् |
56-57 | Sanskrit |
| 17 | रवीन्द्र कालिया की कहानियों में चित्रित सामाजिक यथार्थ डॉ. विनोद बाबूराव मेघशाम |
58-61 | Hindi |
| 18 | अचिन्त्यभेदाभेददर्शनस्य सिद्धान्तसारः अमित कुमार धर दुबे |
62-64 | Sanskrit |
| 19 | गीता में निष्काम कर्मयोग का विवेचन डॉ राधा देवी |
65-67 | Hindi |
| 20 | अनुवाद प्रशिक्षण की सार्थकता डॉ. सुस्मिता कोरोथ एडवना |
68-70 | Hindi |
| 21 | भारतीयज्ञानपरम्परायां न्यायशास्त्रस्य वैशिष्ट्यम् शालिनी कुमारी |
71-73 | Sanskrit |
| 22 | चरकसंहिता में रक्तपित्त व्याधि : उपसर्ग सहित निदान एवं उपचार अपूर्बा हलदर , डॉ० सपना चन्देल |
74-78 | Hindi |
| 23 | निर्मला पुतुल की कविताओं में आदिवासी जीवन का आलोचनात्मक संदर्भ डॉ.एम.अब्दुल रजाक |
79-83 | Hindi |
| 24 | सुमित्रानंदन पंत और कुवेंपु के साहित्य में प्रकृति – प्रतीकात्मकता का चित्रण डॉ. सैयद मुईन |
84-87 | Hindi |
| 25 | वेदेषु पर्यावरणसमस्यायाः समाधानानि सारथी हेमव्रम |
88-90 | Sanskrit |
| 26 | नैषधीयचरितमहाकाव्ये वर्णितानि आयुधानि पूजा नायकः |
91-93 | Sanskrit |
| 27 | अवधीभाषाया अकारान्तवर्तमानकालिकक्रियायाः धातुमूलकत्वविचारः रोहितकुमारद्विवेदी |
94-96 | Sanskrit |
| 28 | अभिलषितार्थचिन्तामणौ गमकाः परीक्षित् बि वशिष्ठः |
97-98 | Sanskrit |
| 29 | Indian Knowledge System in Sanskrit Literature Dr.Pankaj Kumar Mahana |
99-101 | English |
| 30 | संज्ञानात्मक क्षमता पर ॐ जाप का प्रभाव: एक व्यवस्थित वैज्ञानिक विश्लेषण भावना चौहान, डॉ. नितिन कुमार |
102-106 | Hindi |
| 31 | आधुनिकसंस्कृतसाहित्ये प्रमुखपद्यकाव्यानां मीमांसा अमिता शर्मा |
107-111 | Sanskrit |
| 32 | विशिष्टाद्वैतवेदान्तेप्रपत्तियोगस्वरूपम् Uppara Krishnaveni |
112-114 | Sanskrit |
| 33 | राष्ट्र निर्माण में षोडश संस्कारों का महत्व डॉ. वीरेंद्र कुमार, ममलेश्वर प्रसाद |
115-120 | Hindi |
| 34 | मानव जीवन में षट्चक्रों का प्रभाव विक्रम सिंह कण्डारी, डॉ. रूपाली गुप्ता |
121-124 | Hindi |
| 35 | ‘‘राजस्थान के आधुनिक संस्कृत साहित्यकारों का वैदिक विमर्श’’ (17वीं से 20वीं शताब्दी तक) चेतन पुरी, डॉ. अंजना शर्मा |
125-129 | Hindi |
| 36 | वैदिकवाङ्मये पर्यावरणस्थितिः डॉ. हृषिकेशसाहुः |
130-132 | Sanskrit |
| 37 | मनोविज्ञानम् गणेश चन्द्र पण्डा |
133-136 | Sanskrit |
| 38 | आचार्य श्रीवनमालिविश्वालस्य काव्येषु सांस्कृतिक परिशीलनम् ममता महान्त |
137-139 | Sanskrit |
| 39 | “काव्यप्रकाशप्रथमोल्लासस्थित-उत्तम-मध्यम-अधम-काव्यानाम् उदाहरणार्थनिरूपणम्” V. Sarveswararao, Dr.Sujatha Ragavan |
140-142 | Sanskrit |
| 40 | बृहत्संहिता का वृष्टि-विज्ञान: समसामयिक समीक्षा कमलकान्त |
143-146 | Hindi |
| 41 | कालिदासीयं व्यक्तित्वचिन्तनम् सागरिकासरकारः |
147-150 | Sanskrit |
| 42 | मनुस्मृतिदृष्ट्या आध्यात्मचेतनाविचारे अन्तरात्मन आह्वानम् डॉ. मनोजकुमारस्वाइँ |
151-153 | Sanskrit |
| 43 | गौ महिमा सीताशरण नौटियाल |
154-156 | Hindi |
| 44 | रोगनिर्धारणतत्वमीमांसा डा. नीरजभारद्वाजः |
157-159 | Sanskrit |
| 45 | यजुर्वेदे कृष्णशुक्लयोः वैशिष्ट्यम् डॉ मनीषभारद्वाजः |
160-162 | Sanskrit |
| 46 | न्यायवैशेषिकनये, अद्वैतनये च अन्यथासिद्धिविषयकम् एकं तात्त्विकमध्ययनम् प्रवीणः एम्. सज्जनः |
163-167 | Sanskrit |
| 47 | परमहंस शुकदेव और श्रीमद्भागवत का तात्विक स्वरुप डॉ.अमित कुमार पाण्डेय |
168-172 | Hindi |
| 48 | रत्नपालचरितेअलङ्काराणां प्रयोगः फूलचन्द: |
173-178 | Sanskrit |
| 49 | अद्वैत वेदान्त में मोक्ष की अवधारणा – एक शास्त्रीय एवं दार्शनिक अध्ययन डॉ० प्रीति सिरौटीय |
179-181 | Hindi |
| 50 | अद्वैतवेदान्तदिशा जीवस्वरूपप्रतिपादनम् Dr.Monojit Mukherjee |
182-184 | Sanskrit |
| 51 | साम्प्रतिककाले ज्योतिषशास्त्रस्य ज्योतिषतत्त्वप्रकाशग्रन्थस्य च प्रासङ्गिकता अविनाशकुमारः |
185-187 | Sanskrit |
| 52 | सिद्धार्थचरितमहाकाव्ये छन्दस्समीक्षणम् स्वर्णाली पात्र |
188-191 | Sanskrit |
| 53 | वैखानसागमोक्तरीत्या शाकफलविधिविवरणम् Dr. G. Suresh |
192-194 | Sanskrit |
