| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | गढ़वाल का साहित्य एवं इतिहास Sanjay Kumar |
01-05 | Hindi |
| 2 | शाङ्करभाष्यानुसारेण कर्मानुस्मृतिशब्दविध्यधिकरणतात्पर्यालोचनम् कार्त्तिक मण्डलः |
06-07 | Sanskrit |
| 3 | आचार्यशङ्कस्य परमाणुकारणतावादखण्डनयुक्तेः विमर्शः Kabery Hossain |
08-11 | Sanskrit |
| 4 | पञ्चाननतर्करत्नविरचिते अमरमङ्गलम् इति नाटके नाटकलक्षण-विमर्शः अजयतन्तुवायः |
12-15 | Sanskrit |
| 5 | जीवनदर्शनशास्त्रयोरन्तःसम्बन्धः प्रो. जवाहरलाल |
16-18 | Sanskrit |
| 6 | वाजसनेयिप्रातिशाख्यानुसारेणोच्चारणस्थानानि सिद्धान्तषडङ्गी |
19-22 | Sanskrit |
| 7 | ‘‘संस्कृत साहित्य की आधुनिक काव्य विधाएः सामान्य परिचय’’ कल्पेश कुमार शुक्ला , प्रो. डॉ. प्रमोद कुमार वैष्णव |
23-25 | Hindi |
| 8 | डॉ. शंकर पुणतांबेकर : भारतीय नाट्य और रंगमंच परंपरा के संवाहक डॉ. सैयद मुईन |
26-29 | Hindi |
| 9 | प्राचीनभारते परिवेशभारसाम्यार्थभूमिसंरक्षणं – कौटिलीयेऽर्थशास्त्रे सन्तोष मण्डलः |
30-32 | Sanskrit |
| 10 | अस्माकं समाजः भगवत्पादाश्च सुशान्तमण्डलः |
33-36 | Sanskrit |
| 11 | भास्करोक्तपर्वसाधनम् डा. राघवेन्द्रः |
37-39 | Sanskrit |
| 12 | The Place of Women: In The Political Thought of Plato Sumit Mondal |
40-43 | English |
| 13 | एनईपी 2020 और भारतीय भाषाओं का संवर्द्धन रामकुमार सिंह कंवर |
44-47 | Hindi |
| 14 | पाणिनिजैनेन्द्रव्याकरणयोः सनाद्यन्तप्रत्ययानां तुलनात्मकमध्ययनम् दयाराम गौतमः |
48-50 | Sanskrit |
| 15 | हिन्दी कथा-साहित्य में कामकाजी स्त्री: अस्मिता, संघर्ष और अंतर्द्वंद्व साक्षी त्रिपाठी, डॉ० बृजमोहन द्विवेदी |
51-55 | Hindi |
| 16 | पाणिनिजैनेन्द्रव्याकरणयोः सुप्प्रत्ययानां तुलनात्मकमध्ययनम् हरिशंकरकुमारः |
56-60 | Sanskrit |
| 17 | “डिजिटल युग में हिंदी यात्रा-साहित्य का बदलता स्वरूप : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” पीयूष जैन |
61-64 | Hindi |
| 18 | मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं में गांधी दर्शन के विचार डॉ.एम. अब्दुल रजाक |
65-69 | Hindi |
| 19 | द्विसन्धान महाकाव्य और रामायण में साम्यवृत विवेचन कुलभूषण शारदा |
70-72 | Sanskrit |
| 20 | रत्नपालचरितस्य परिचयः फूलचन्द: |
73-76 | Sanskrit |
| 21 | युवा वर्ग में अहिंसा के विकास हेतु गांधी दर्शन एवं अष्टांग योग की प्रासंगिकता बृज बिलास राय, डा. यशपाल सिंह |
77-78 | Hindi |
| 22 | “यूरोपीय लोककथाओं के संदर्भ में देवेंद्र कुमार के साहित्य में निहित बाल शिक्षा” प्रीति सोनी , डॉ. सुधीर साहू |
79-81 | Hindi |
| 23 | संस्कृतबङ्गभाषयोः नैसर्गिकं सान्निहित्यम् कौशिकहालदारः |
82-84 | Sanskrit |
| 24 | अष्टावक्रगीतायां निहितसामाजिकतत्त्वानि (A Study of Social Elements in Ashtavakragita) Shankar datta Joshi |
85-87 | Sanskrit |
| 25 | “गिरिराज किशोर के साहित्य में गाँधीवादी दृष्टि” हरिकांत साहू , डॉ. अभिषेक दाँगी |
88-91 | Hindi |
| 26 | गीतांजलि श्री एवं नीलाक्षी सिंह की रचनाओं में शिल्प, भाषा और शैली का तुलनात्मक अध्ययन रेखा पटेल, डॉ. रश्मि जैन |
92-96 | Hindi |
| 27 | भट्टलोलट्ट–भट्टनायक–शंकुक–अभिनवगुप्त : रससिद्धान्तस्य सौंदर्यशास्त्रीयम् अनुशीलनम् डॉ० प्रीति सिरौटीय |
97-100 | Sanskrit |
| 28 | प्राण चिकित्सा के माध्यम से मानसिक एवं शारीरिक आरोग्यता प्रतिभा, डॉ रमेश कुमार |
101-103 | Hindi |
| 29 | संस्कृतवाङ्मयसहितश्रीमद्भागवताग्निमहापुराणयोः मोक्षप्राप्तये अष्टसिद्धीनामनुशीलनम् खेमराजः |
104-107 | Sanskrit |
| 30 | The Architecture of Ritual: A Critical Analysis of Pūrva-Mīmāmsā Philosophy Prabhat Mondal |
108-110 | English |
| 31 | Ishwar Chandra Vidyasagar’s Translation of European Classics: A Translation Study Tanmoy Pandit |
111-114 | English |
| 32 | Concept of Consciousness in Patañjali Yoga Sūtra and Its Correlation with Modern Neuroscience Dr. Anjali Prabhakar |
115-117 | English |
| 33 | यौगिक जीवनशैली एवं मानसिक स्वास्थ्य सतेन्द्र |
118-120 | Hindi |
| 34 | श्रीतुलसीमहाकाव्ये धर्मशास्त्रवैज्ञानिकांशाः राकेशपरिडा |
121-122 | Sanskrit |
| 35 | गीतशङ्कर-गीतसुन्दरकाव्ययोः वसन्तवर्णनम् । संघमित्रा जेना |
123-125 | Sanskrit |
| 36 | अजेर्व्यघञपोः सूत्रविमर्शः श्री शिवप्रसाद शुक्लः |
126-129 | Sanskrit |
| 37 | समकालीन हिंदी साहित्य के विविध अस्मितामूलक विमर्श: 21वीं सदी के उपन्यासों में वृद्ध विमर्श डॉ. गोविंद जाधव |
130-131 | Hindi |
| 38 | Concept of Puruṣa in Säṁkhya Raghu H Megalamani, Amiya Das, Dr. Krishna Sharma, Dr. M Padmanabha Marathe |
132-135 | English |
| 39 | पूर्वोत्तर के जनजातीय वाद्ययंत्र : एक परिचयात्मक अध्ययन ज्योतिका बशिष्ठ |
136-141 | Hindi |
| 40 | समकालीन हिंदी काव्यालोचना और अस्मितावादी विमर्श डॉ.पूनम कुमारी |
142-146 | Hindi |
| 41 | मालतीमाधवम् में अतिप्राकृत तत्त्व डॉ० (श्रीमती) मनीषा शर्मा |
147-150 | Hindi |
| 42 | स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता का शिल्प डॉ० स्वाति सिंह |
151-156 | Hindi |
| 43 | जनजातीय सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी प्रथाएँ डॉ. महमद नयास पाशा |
157-160 | Hindi |
| 44 | भारतीय समाज पर भूमंडलिकरण का प्रभाव यू. हरिकृष्ण आचार |
161-164 | Hindi |
| 45 | भारतीयज्ञानपरम्परायां संस्कृतभाषाविज्ञानस्य तथा व्याकरणस्य योगदानम्। डा. मिलनमाजी |
165-169 | Sanskrit |
| 46 | चक्रपाणिटीकानुसारं चरकसंहितायाः सूत्रस्थानस्य प्रथमचत्वारोऽध्यायानां समीक्षा डा.तरुण कुमार माइति |
170-173 | Sanskrit |
| 47 | ‘‘यौगिक जीवन शैली और श्रीअन्न (मिलेट्स) का स्वास्थ्य पर प्रभाव’’ डॉ. मंजू सिंह ठाकुर |
174-177 | Hindi |
| 48 | Comparative Perspectives on Western and Indian Social Philosophy Dr. Mami Mahanta |
178-183 | English |
| 49 | शाङ्कराचार्य-शैवदर्शनयोः अद्वैतवादस्य विश्लेषणात्मकमध्ययनम् अशोका रुइदास |
184-187 | Sanskrit |
| 50 | वेणीसंहारे सुवदनाचरित्रचित्रणम् सिद्धार्थवैराग्यः |
188-191 | Sanskrit |
| 51 | पातञ्जल महाभाष्यटीका सूक्तिरत्नाकर का ऊह सम्बधित परिप्रेक्ष्य संजीव कुमार, प्रोफेसर ओमनाथ बिमली |
192-198 | Sanskrit |
| 52 | स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी महानायक बिरसा मुंडा डॉ. विनोद बाबुराव मेघशाम |
199-201 | Hindi |
| 53 | Shatkarma in Integrative Health: From Yogic Purification Roots to Modern Therapeutic Evidence Mr.Anoop Pandey, Mr.Anil Kumar Yadav, Dr.Balvir Singh, Dr.Vijay Bhan Azad, Dr. Naman Yadav |
202-205 | English |
| 54 | भाषाई माध्यम एवं पारिवारिक प्रोत्साहन माध्यमिक स्तर का अध्ययन अनिल कुमार कश्यप, बेबी कुमारी |
206-208 | Hindi |
| 55 | महाभाष्यकारस्य पतञ्जलेर्व्याख्यानपद्धतिः गणेशमहतो, सदानन्दः |
209-212 | Sanskrit |
| 56 | हिंदी कहानी और जीवन की वास्तविकता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन डॉ नीलकंठ कुमार |
213-217 | Hindi |
| 57 | प्राचीन भारतीय राजव्यवस्था: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में Dr. Darin Sarkar |
218-221 | Sanskrit |
| 58 | संस्कृतसाहित्ये छन्दोविचारः, छन्दस्सु अनुष्टुपछन्द: Dr.Harikrishna Kondapalli |
222-223 | Sanskrit |
| 59 | “भाषाशिक्षणे सूचनासंचारप्रौद्योगिक्यनुप्रयोगे समस्याः समाधानञ्च” मनोज कुमार पांडेयः, डाँ. शिवदत्त आर्यः |
224-229 | Sanskrit |
| 60 | “काशी के सांस्कृतिक और साहित्यिक पर्यटन का अध्ययन: जयशंकर प्रसाद के कृतित्व के संदर्भ में” वत्सल श्रीवास्तव, डॉ० सतीश चंद्र जैसल |
230-232 | Hindi |
| 61 | Application of Teaching Principles of Bhagavad Gita in Higher Education: An Analytical Study Dr.Ram Kishore, Mr.Anil Kumar Yadav, Mr.Anoop Pandey,Dr.Balvir Singh, Dr. Sravan Kumar Singh Yadav |
233-236 | English |
| 62 | “The Agony of Triumph: A Study of Emily Dickinson’s ‘Success is counted sweetest’” Jayantakumar Panda |
237-240 | English |
| 63 | भक्ति काव्य और हिंदी आलोचना : परंपरा, प्रवृत्तियाँ और आधुनिक पुनर्पाठ प्रतिभा झा |
241-243 | Hindi |
| 64 | वाचिक परंपरा के संदर्भ में, पंडित गंगाधर व्यास की चौकड़ियों का अध्ययन महीपत श्रीवास, डॉ. रघुनाथ पाल |
244-246 | Hindi |
| 65 | रामायणे वर्णिता पाककला सन्दीपन रायः |
247-250 | Sanskrit |
| 66 | वैदिक कालीन भारत में गणतंत्र व्यवस्था के तत्व : एक ऐतिहासिक-दार्शनिक अनुशीलन डॉ० दीपक कुमार पाठक |
251-254 | Sanskrit |
| 67 | The Will to Resist: A Meditation on ‘To Be Weak Is to Be Miserable’ Jayantakumar Panda |
255-258 | English |
| 68 | विशिष्टाद्वैतवेदान्तानुसारं गीतायामात्मतत्त्वविचारः Dr. Markanda Nayak |
259-262 | Sanskrit |
| 69 | योगदर्शने आध्यात्मिक भक्तियोगाश्च डा. सुप्रिया वेरा |
263-266 | Sanskrit |
| 70 | Effects of the Post-Truth Era on the Indian Knowledge Landscape Dr Lakshmi Vijayan V T |
267-271 | English |
| 71 | कालिदासरूपकेषु प्रेमिक-प्रेमिकयोः चरितविमर्शः गौराङ्ग साउ |
272-278 | Sanskrit |
| 72 | उपनिषदां दार्शनिकमहत्त्वम् (उपनिषदां स्वरूपम्, विषयः, संख्या, दर्शनम् च) N.Aravindhan |
279-281 | Sanskrit |
| 73 | दूतकाव्यपरम्परायां जीमूतदूतम् दुर्गाशङ्करपण्डा |
282-284 | Sanskrit |
| 74 | उपनिषद्वाङ्मये राष्ट्रस्य महत्त्वम् Dr. M. Dattatraya Sharma |
285-287 | Sanskrit |
| 75 | उपनिषत्सु मुख्यब्रह्मोपसनाविचारविमर्शः Dr. Santu Kumar Pan |
288-292 | Sanskrit |
| 76 | रुचिकराणि भोज्यपदार्थानि Dr. T. Venkateswarlu |
293-296 | Sanskrit |
| 77 | वराहपुराणे वर्णितं व्रताः उत्सवाश्च : भारतीयलोकसंस्कृतिः सन्दर्भे रणजित् बाग्दी, डॉ. हरीशदासः |
297-299 | Sanskrit |
| 78 | वेदान्तशास्त्रे ब्रह्मस्वरूपम् एकम् अध्ययनम् मधुमिता गुच्छाइत् |
300-305 | Sanskrit |
| 79 | भारतीय दर्शनों में योगदर्शन का स्थान-विमर्श ईशाद्री दास |
306-307 | Hindi |
| 80 | संसारोच्छेदो मुक्तिः मामिना साहुः |
308-312 | Sanskrit |
