| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
|---|
| 1 | A Psychological Study of Hasya Rsasa Dr. Amlan Acharya |
01-03 | English |
| 2 | The masterpiece poetry of Kamala Das named “An Introduction”: From Silence to Self Jayantakumar Panda |
04-07 | English |
| 3 | “पत्युर्नो यज्ञसंयोगे” इति सूत्रे निहितः स्त्रीस्थानविमर्शः – सामाजिकभाषाशास्त्रीयं विश्लेषणम्। Dr. Thahira P. |
08-09 | Sanskrit |
| 4 | घुमंतु जनजाति – बंजारा समुदाय का लोक-साहित्य डॉ. कृष्णा डी लमाणि |
10-13 | Hindi |
| 5 | वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पातंजल योगसूत्र मे वर्णित यम- नियम की नैतिक मूल्यों में उपयोगिता धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. राकेश कुमार सिंह |
14-16 | Hindi |
| 6 | शुक्लयजुर्वेदे स्वरभक्तिः आराध्युल रमेशः |
17-19 | Sanskrit |
| 7 | पण्डित दुर्गादत्त शास्त्री के काव्यों में बाल-विवाह : राष्ट्रोन्नति पर बाधक तत्व के रूप में अनु देवी, डॉ.सपना चन्देल |
20-24 | Hindi |
| 8 | “The Mountain and the Squirrel”: Talents Differ, and All Is Wisely Put Jayantakumar Panda |
25-28 | English |
| 9 | “A Study of Students’ Welfare Prakalpa Programs in West Bengal High Schools” Nabakumar Rajbanshi |
29-31 | English |
| 10 | देवीपुराणे योगसम्मतेश्वरतत्त्वविमर्शः Snigdha Poddar |
32-34 | Sanskrit |
| 11 | मृच्छकटिकाधारेण आदर्शः चरित्रं चारुदत्तः डॉ. हेमन्तकुमार नेपाल |
35-39 | Sanskrit |
| 12 | ‘कविवररामलखनपाण्डेयस्य कृतीनां परिचयात्मकं विवेचनम्’ हरिश्चन्द्रः, प्रो.सनन्दनकुमारत्रिपाठी |
40-45 | Sanskrit |
| 13 | वैदिककालीन अर्चना-परम्परा एवं वास्तु-विज्ञान डॉ. पुष्पेन्द्र जोशी |
46-49 | Sanskrit |
| 14 | अदर्शनं लोप: महाभाष्यदृष्ट्या तत्त्वमीमांसा Dr. Santosh Majhi |
50-51 | Sanskrit |
| 15 | भारतीय ज्ञान परम्परा में भूगर्भ विज्ञान डॉ प्रभात नारायण पाण्डेय |
52-54 | Sanskrit |
| 16 | ‘अथातो ब्रह्मजिज्ञासा’ : ब्रह्मसूत्र का दार्शनिक आधार डॉ० दीपक कुमार पाठक |
55-59 | Sanskrit |
| 17 | The World Is Too Much with Us: A Vedantic Reflection Jayantakumar Panda |
60-63 | English |
| 18 | काण्वशतपथब्राह्मणे निरूपितस्य अग्न्याधेयस्य कालवैविध्यपरिशीलनम् एच वी अमरनाथ |
64-67 | Sanskrit |
| 19 | विवाहविधिः Dr. Markanda Nayak |
68-70 | Sanskrit |
| 20 | समकालीन हिंदी रंगमंच के संदर्भ में ‘एक अधपका-सा नाटक’ का अध्ययन अकबरअली शेख |
71-73 | Hindi |
| 21 | ‘रेडियो कोसी’ उपन्यास में वर्णित बाढ़ प्रभावित जनजीवन अर्पिता शुक्ला , डॉ अचला पांडेय |
74-76 | Hindi |
| 22 | विदग्धमाधवम् नाटकस्य काव्यशास्त्रीयमध्ययनम् सुनन्दा दे |
77-83 | Sanskrit |
| 23 | जनजातीयानामुत्थाने आदिवासिमहापुरुषस्य श्रीरामेश्वरस्य शैक्षिकमाध्यात्मिकयोगदानम् कुमारी शीतला, डॉ.जि.नरसिम्हुलु |
84-88 | Sanskrit |
| 24 | भारतविजयनाटके धर्मशास्त्रीयमूल्यम् अक्षयकुमाररायः |
89-91 | Sanskrit |
| 25 | Education System And Intellectual Pursuits During The Pāla Period As Reflected In The Inscriptions Of Ancient Bengal Abhijit Roy |
92-96 | English |
| 26 | प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा में नारी महिमा मनोज कुमार शुक्ल, तरुण कुमार शर्मा |
97-100 | Sanskrit |
| 27 | Description of nature in the epic ‘Śiśupālvadham’ Anal Kumar Kisku |
101-104 | English |
| 28 | लघुत्रय्यां बृहत्त्रय्यां गुणपरिमानविचारसमीक्षणम् Sanchita Chakraborty |
105-107 | Sanskrit |
| 29 | द्वैतदर्शने प्रामाणिकप्रतियोगिकत्वं मुनित्रयसम्मतम् कृष्णाचार्य पुरोहितः |
108-112 | Sanskrit |
| 30 | राष्ट्रभृत् होम: एक अध्ययन। शुभमकुमारपाण्डेय |
113-116 | Sanskrit |
| 31 | शून्ये मेघगानमिति काव्यग्रन्थे उपमानां नव्यता डॉ सङ्गीता मण्डल |
117-119 | Sanskrit |
| 32 | वेदों में राष्ट्र की अवधारणा : एक समग्र चिंतन निखिल, डॉ सोमकृष्ण |
120-122 | Hindi |
| 33 | रामायण एवं अर्थशास्त्र में सुशासन की अवधारणा परमेश्वर नन्द |
123-127 | Hindi |
| 34 | बेतवा बहती रहे में स्त्री बोध एवं समीक्षा दीपिका व्यास, डा. जसबीर सिंह |
128-131 | Hindi |
| 35 | A Comparative Study: The Contributions Of Government And Self-Financed Primary School Teachers To Students’ Academic Achievement Mr. Debanand Ray |
132-136 | English |
| 36 | अद्वैतवेदान्ते अविद्या – अध्यास – जीवन्मुक्तितत्त्वानां तात्त्विकमीमांसा (A Research Study on Avidyā, Adhyāsa and Jīvanmukti in Advaita Vedānta) कल्याणी पाण्डा |
137-140 | Sanskrit |
| 37 | अर्वाचीन एवं प्राचीन वेद भाष्यकारों का समीक्षात्मक अध्ययन अवधेश सिंह |
141-144 | Sanskrit |
| 38 | वैज्ञानिकमते सृष्ट्युत्पत्तौ कालाकाशयोर्भूमिका Dr. Lipi Patra |
145-149 | Sanskrit |
| 39 | ‘त्रिगुणात्मकान्तःकरणवृत्तेः विचारः’ (Study of Triguṇa natured Antaḥkaraṇa according to Vedānta philosophy) विजयलक्ष्मी अम्माल् |
150-151 | Sanskrit |
| 40 | भारतीयदर्शनेषव्यक्तित्वविकासोपायाः डां. नरेन्द्र कुमारः |
152-156 | Sanskrit |
| 41 | প্রাচীন ‘মনুসংহিতার’ বর্ণ-ব্যবস্থা বনাম বর্তমান সমাজে দলিত সম্প্রদায় Aditi Mandal |
157-159 | Sanskrit |
| 42 | अलङ्कारेषु व्याकरणसिद्धान्ता: सुमन कोइराला |
160-162 | Sanskrit |
| 43 | मीमांसा-वेदान्त-सांख्याभिमत अवयवत्रयवादपरम्पराविमर्शः सन्तोषी महापात्रः |
163-166 | Sanskrit |
| 44 | वास्तुशास्त्रे पञ्चमहाभूत-प्राकृतिकशक्तिनां विमर्श: Ruchika Upadhyay, Dr. Yogendra Kumar Sharma |
167-171 | Sanskrit |
| 45 | Sanskrit Journalism Across Formats: A Critical Study of Its Evolution and Contemporary Relevance Mr. Vikas Gurikar |
172-176 | English |
| 46 | योग एवं मनोविज्ञान के अंतसंबंधः (मानव स्वास्थ्य के विशेष संदर्भ में) अभिषेक कुमार, प्रो.जवाहर लाल |
177-180 | Sanskrit |
| 47 | आचार्यबनमालीबिश्वालविरचितकाव्येषु नारीस्वरूपविमर्शः स्नेहाञ्जलि साहु |
181-184 | Sanskrit |
| 48 | असिद्धं बहिरङ्गमन्तरङ्गे इति परिभाषयाः विश्लेषणं डॉ० आभा जैन |
185-186 | Sanskrit |
| 49 | योग की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपचारात्मक उपयोगिता अभिषेक कुमार, प्रो.जवाहर लाल |
187-189 | Hindi |
| 50 | आचार्यहेमचन्द्रस्य ध्यानयोगस्य सिद्धान्तपरकसंरचना प्रासंगिकता च दीपक कुमार |
190-192 | Sanskrit |
| 51 | वर्तमानकाले मानवाणां दुःखनिवारणे सांख्यदर्शनस्य प्रासङ्गिकताच Debarati Datta |
193-196 | Sanskrit |
| 52 | जीवानन्दनम् नाटक में मानवीय मूल्य आकांक्षा द्विवेदी |
197-200 | Sanskrit |
| 53 | पाणिनीयव्याकरणे परिभाषासूत्रस्य प्राशस्त्यम् Dr. Dilip Kumar Das |
201-203 | Sanskrit |
| 54 | विशिष्टाद्वैसिद्धान्तपरिचयः ब्रह्मसूत्रप्रमेश्च आर् यश्वन्त श्रीशायि दीक्षितः |
204-207 | Sanskrit |
| 55 | सिद्धसिद्धान्तपद्धतौ सद्गुरुतत्त्वं तथा अवधूतयोगिलक्षणम् पुलक-दासः |
208-212 | Sanskrit |
| 56 | राजयक्ष्मा रोग तथा उसका उपचार (चरकसंहिता के संदर्भ में) अपूर्बा हलदर |
213-217 | Hindi |
| 57 | पाणिनीये ‘आख्यातोपयोगे’ इति सूत्रस्य पदार्थविमर्शः कौशिक-प्रधानः |
218-221 | Sanskrit |
| 58 | वैयाकरणसिद्धान्तकौमुद्याः स्त्रीप्रत्ययान्तानां नवीनोदाहरणानि सुभाष-वैद्यः |
222-225 | Sanskrit |
| 59 | नैतिक शिक्षा तथा व्यवहार डॉ. विष्णुप्रिया जेना |
226-228 | Hindi |
| 60 | आधुनिकसंस्कृतसाहित्यस्य विकासपरम्परायां रामाशीषपाण्डेयस्य अवदानं निरीक्षणम् मधुमिता दासः |
229-232 | Sanskrit |
| 61 | सामवेदीय-ऋक्तन्त्रोक्तवर्णोच्चारणविधीनां विमर्शः हरिश्चंद्र मालू गवस, प्रो.हरेकृष्ण अगस्ती |
233-236 | Sanskrit |
| 62 | गुल्मिनी गीतिकाव्ये प्रकृतिचित्रणम् -एकम् अध्ययनम् लक्ष्मीश्री बेहेरा |
237-239 | Sanskrit |
| 63 | वैदिकसन्ध्योपासनपद्धतिविमर्श: जयप्रकाशपाठक: |
240-243 | Sanskrit |
| 64 | महाराष्ट्रीय हिन्दी भाषा – एक वैचारिक संश्लेषण एवं महाराष्ट्र में भावी अनुसंधान की रूपरेखा डॉ. रति सुलेगाव |
244-245 | Hindi |
| 65 | “अभिज्ञानशाकुन्तलम्” इति नाटके मार्गदर्शन-परामर्शतत्त्वानां तात्त्विकमध्ययनम् गायत्री पण्डा |
246-248 | Sanskrit |
