| S. No. | Manuscript Title & Author | Page No. | Read Article | Language |
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| 1 | “काशी के सांस्कृतिक और साहित्यिक पर्यटन का अध्ययन: जयशंकर प्रसाद के कृतित्व के संदर्भ में” वत्सल श्रीवास्तव, डॉ० सतीश चंद्र जैसल |
230-232 | Hindi |
| 2 | हिंदी कहानी और जीवन की वास्तविकता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन डॉ नीलकंठ कुमार |
213-217 | Hindi |
| 3 | भाषाई माध्यम एवं पारिवारिक प्रोत्साहन माध्यमिक स्तर का अध्ययन अनिल कुमार कश्यप, बेबी कुमारी |
206-208 | Hindi |
| 4 | स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी महानायक बिरसा मुंडा डॉ. विनोद बाबुराव मेघशाम |
199-201 | Hindi |
| 5 | ‘‘यौगिक जीवन शैली और श्रीअन्न (मिलेट्स) का स्वास्थ्य पर प्रभाव’’ डॉ. मंजू सिंह ठाकुर |
174-177 | Hindi |
| 6 | भारतीय समाज पर भूमंडलिकरण का प्रभाव यू. हरिकृष्ण आचार |
161-164 | Hindi |
| 7 | जनजातीय सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी प्रथाएँ डॉ. महमद नयास पाशा |
157-160 | Hindi |
| 8 | स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता का शिल्प डॉ० स्वाति सिंह |
151-156 | Hindi |
| 9 | मालतीमाधवम् में अतिप्राकृत तत्त्व डॉ० (श्रीमती) मनीषा शर्मा |
147-150 | Hindi |
| 10 | समकालीन हिंदी काव्यालोचना और अस्मितावादी विमर्श डॉ.पूनम कुमारी |
142-146 | Hindi |
| 11 | पूर्वोत्तर के जनजातीय वाद्ययंत्र : एक परिचयात्मक अध्ययन ज्योतिका बशिष्ठ |
136-141 | Hindi |
| 12 | समकालीन हिंदी साहित्य के विविध अस्मितामूलक विमर्श: 21वीं सदी के उपन्यासों में वृद्ध विमर्श डॉ. गोविंद जाधव |
130-131 | Hindi |
| 13 | यौगिक जीवनशैली एवं मानसिक स्वास्थ्य सतेन्द्र |
118-120 | Hindi |
| 14 | प्राण चिकित्सा के माध्यम से मानसिक एवं शारीरिक आरोग्यता प्रतिभा, डॉ रमेश कुमार |
101-103 | Hindi |
| 15 | गीतांजलि श्री एवं नीलाक्षी सिंह की रचनाओं में शिल्प, भाषा और शैली का तुलनात्मक अध्ययन रेखा पटेल, डॉ. रश्मि जैन |
92-96 | Hindi |
| 16 | “गिरिराज किशोर के साहित्य में गाँधीवादी दृष्टि” हरिकांत साहू , डॉ. अभिषेक दाँगी |
88-91 | Hindi |
| 17 | “यूरोपीय लोककथाओं के संदर्भ में देवेंद्र कुमार के साहित्य में निहित बाल शिक्षा” प्रीति सोनी , डॉ. सुधीर साहू |
79-81 | Hindi |
| 18 | युवा वर्ग में अहिंसा के विकास हेतु गांधी दर्शन एवं अष्टांग योग की प्रासंगिकता बृज बिलास राय, डा. यशपाल सिंह |
77-78 | Hindi |
| 19 | मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं में गांधी दर्शन के विचार डॉ.एम. अब्दुल रजाक |
65-69 | Hindi |
| 20 | “डिजिटल युग में हिंदी यात्रा-साहित्य का बदलता स्वरूप : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” पीयूष जैन |
61-64 | Hindi |
| 21 | हिन्दी कथा-साहित्य में कामकाजी स्त्री: अस्मिता, संघर्ष और अंतर्द्वंद्व साक्षी त्रिपाठी, डॉ० बृजमोहन द्विवेदी |
51-55 | Hindi |
| 22 | एनईपी 2020 और भारतीय भाषाओं का संवर्द्धन रामकुमार सिंह कंवर |
44-47 | Hindi |
| 23 | डॉ. शंकर पुणतांबेकर : भारतीय नाट्य और रंगमंच परंपरा के संवाहक डॉ. सैयद मुईन |
26-29 | Hindi |
| 24 | ‘‘संस्कृत साहित्य की आधुनिक काव्य विधाएः सामान्य परिचय’’ कल्पेश कुमार शुक्ला , प्रो. डॉ. प्रमोद कुमार वैष्णव |
23-25 | Hindi |
| 25 | गढ़वाल का साहित्य एवं इतिहास Sanjay Kumar |
01-05 | Hindi |
| 26 | तनाव प्रबंधन में योग की भूमिका सतेन्द्र |
185-186 | Hindi |
| 27 | तुलसीराम के मुर्दहिया में विद्यालयीन जीवन का संघर्ष जितेंद्र प्रताप सेन , डॉ. रोशनलाल अहिरवार |
180-184 | Hindi |
| 28 | आध्यात्मिकता, योग और मनोचिकित्सका के सन्दर्भ में (महर्षि दयानंद दर्शन का मनोवैज्ञानिक अध्ययन) रजनीश कुमार पाण्डेय, प्रमोद कुमार |
173-175 | Hindi |
| 29 | स्मृति से सृजन तक: ममता कालिया के संस्मरणों में रचना- प्रक्रिया का आत्मकथ्य डॉ. प्रभात शर्मा |
142-145 | Hindi |
| 30 | आधुनिक समाज में हिंसा की समस्या और समाधान : गांधी एवं अष्टांग योग की अहिंसात्मक दृष्टि बृज बिलास राय , डा. यशपाल सिंह |
140-141 | Hindi |
| 31 | दुर्गा सप्तशती : एक शोधपरक अध्ययन डॉ.अमित कुमार पाण्डेय |
100-103 | Hindi |
| 32 | मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यासों में स्त्री संघर्ष फरीदा उक्कली, प्रो.श्रीमती राजू. बागलकोट |
93-95 | Hindi |
| 33 | उषा प्रियवंदा के कथा साहित्य में जीवन मूल्य का अध्ययन सोनिका कुमारी, डॉ. दीपिका जैन |
77-80 | Hindi |
| 34 | कर्नाटक के महत्वपूर्ण लोक वाद्ययंत्र डॉ. सैयद मुईन |
35-38 | Hindi |
| 35 | कबीर : अनुभव की भाषा और समाज के सत्य का दर्पण दुर्गेश कुमार टंडन, डॉ.जयपाल सिंह प्रजापति |
31-34 | Hindi |
| 36 | महाभाष्य पर टीकाकारों का योगदानः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन नीरज फोन्दणी |
29-30 | Hindi |
| 37 | विद्यासागर नौटियाल के उपन्यास ‘मेरा जामक वापस दो’ में राष्ट्र विकास का चिंतन करूणा गायकवाड़ , डॉ.जयपाल सिंह प्रजापति |
09-11 | Hindi |
| 38 | ‘‘ राजस्थान के आधुनिक संस्कृत महाकाव्यों की प्रवृत्तियाँ ” (17वीं से 20वीं शताब्दी तक) चेतन पुरी, डॉ. अंजना शर्मा |
04-08 | Hindi |
| 39 | अद्वैत वेदान्त में मोक्ष की अवधारणा – एक शास्त्रीय एवं दार्शनिक अध्ययन डॉ० प्रीति सिरौटीय |
179-181 | Hindi |
| 40 | परमहंस शुकदेव और श्रीमद्भागवत का तात्विक स्वरुप डॉ.अमित कुमार पाण्डेय |
168-172 | Hindi |
| 41 | गौ महिमा सीताशरण नौटियाल |
154-156 | Hindi |
| 42 | बृहत्संहिता का वृष्टि-विज्ञान: समसामयिक समीक्षा कमलकान्त |
143-146 | Hindi |
| 43 | ‘‘राजस्थान के आधुनिक संस्कृत साहित्यकारों का वैदिक विमर्श’’ (17वीं से 20वीं शताब्दी तक) चेतन पुरी, डॉ. अंजना शर्मा |
125-129 | Hindi |
| 44 | मानव जीवन में षट्चक्रों का प्रभाव विक्रम सिंह कण्डारी, डॉ. रूपाली गुप्ता |
121-124 | Hindi |
| 45 | राष्ट्र निर्माण में षोडश संस्कारों का महत्व डॉ. वीरेंद्र कुमार, ममलेश्वर प्रसाद |
115-120 | Hindi |
| 46 | संज्ञानात्मक क्षमता पर ॐ जाप का प्रभाव: एक व्यवस्थित वैज्ञानिक विश्लेषण भावना चौहान, डॉ. नितिन कुमार |
102-106 | Hindi |
| 47 | सुमित्रानंदन पंत और कुवेंपु के साहित्य में प्रकृति – प्रतीकात्मकता का चित्रण डॉ. सैयद मुईन |
84-87 | Hindi |
| 48 | निर्मला पुतुल की कविताओं में आदिवासी जीवन का आलोचनात्मक संदर्भ डॉ.एम.अब्दुल रजाक |
79-83 | Hindi |
| 49 | चरकसंहिता में रक्तपित्त व्याधि : उपसर्ग सहित निदान एवं उपचार अपूर्बा हलदर , डॉ० सपना चन्देल |
74-78 | Hindi |
| 50 | अनुवाद प्रशिक्षण की सार्थकता डॉ. सुस्मिता कोरोथ एडवना |
68-70 | Hindi |
| 51 | गीता में निष्काम कर्मयोग का विवेचन डॉ राधा देवी |
65-67 | Hindi |
| 52 | रवीन्द्र कालिया की कहानियों में चित्रित सामाजिक यथार्थ डॉ. विनोद बाबूराव मेघशाम |
58-61 | Hindi |
| 53 | वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक परिवर्तन: जयपुर के मध्यम वर्गीय समाज का समाजशास्त्रीय अध्ययन Dr. Daya Shankar Sharma |
39-42 | Hindi |
| 54 | वैदिक व अवैदिक काल में शिक्षाशास्त्रियों के दर्शनशास्त्र का वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में तुलनात्मक अध्ययन मनीषा, डॉ. मनोज जोशी |
35-38 | Hindi |
| 55 | दिव्यांगजनों की आर्थिक आत्म निर्भरता का विश्लेषणात्मक अध्ययन: दिव्यकला मेला के विशेष संदर्भ में श्री सुनील कुमार शिरपूरकर |
28-30 | Hindi |
| 56 | वेदों में आयुर्वेदिक चिकित्सा डॉ. पूजा कुमारी |
20-23 | Hindi |
| 57 | साहित्य और समाज का सम्बन्ध डॉ. मथुरा इमलाल |
05-06 | Hindi |
| 58 | पुस्तकालय कार्यबल और डिजिटल कौशल विकास : वर्तमान आवश्यकताएँ और भविष्य की राह कु० शालू , डा.बसवराज एम.टी. |
01-04 | Hindi |
| 59 | योगसूत्र और विशुद्धिमग्ग का तुलनात्मक अध्ययन डॉ० प्रीति सिरौटीय |
260-263 | Hindi |
| 60 | नाद योग में श्वास, ध्वनि और माइंडफुलनेस सुनील कुमार तिवारी |
252-254 | Hindi |
| 61 | सनातन धर्म में गो पूजन का धार्मिक एवं सामाजिक महत्व; एक अध्ययन डॉ.अमित कुमार पाण्डेय |
247-249 | Hindi |
| 62 | मानस संवाद वर्तमान शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में लक्ष्मी नौटियाल |
233-236 | Hindi |
| 63 | दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष में वर्णित गर्भविज्ञान : एक समीक्षात्मक अध्ययन कमलकान्त |
219-222 | Hindi |
| 64 | समाजिक बदलाव में अनुवाद की भूमिका डॉ. सुस्मिता कोरोथ एडवना |
194-199 | Hindi |
| 65 | शिक्षा का सामाजिक परिवर्तन में योगदान सुश्री.मोनिका शर्मा |
171-174 | Hindi |
| 66 | वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गीता की उपयोगिता डॉ मधु माला सिन्हा |
160-162 | Hindi |
| 67 | डॉ निरञ्जन मिश्र द्वारा रचित महाकाव्यों की विशेषताएँ (ग्रन्थिबन्धनम् महाकाव्य के विशेष सन्दर्भ में) ज्योति देवी |
156-159 | Hindi |
| 68 | गायत्री मन्त्र चिकित्सा द्वारा मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन आचार्य इन्द्रजीत शर्मा, जिज्ञासा ठाकुर |
139-145 | Hindi |
| 69 | “श्रावकाचार ग्रंथों में सम्यक्दर्शन, सम्यक्ज्ञान और सम्यक्चरित्र की त्रिवेणी: एक अध्ययन” कल्पना जैन |
130-132 | Hindi |
| 70 | वर्तमान परिपेक्ष्य में क्रियायोग की उपयोगिता: एक अनुशीलन डॉ. श्याम सुन्दर पाल, डॉ अशोक भास्कर |
111-116 | Hindi |
| 71 | जैन प्राकृत साहित्य में वैज्ञानिक प्रमेय पारस जैन |
100-104 | Hindi |
| 72 | आगम के विविध लक्षणों का समन्वय प्रशांत जैन |
96-99 | Hindi |
| 73 | समग्र और बहुविषयक शिक्षा के लिए एक नया दृष्टिकोण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 और भारतीय उच्च शिक्षा का भविष्य डॉ. कुमार बागेवाडिमठ |
87-90 | Hindi |
| 74 | “अष्टछाप संप्रदाय और कवि परमानन्द दास का काव्य” सपना कुमारी राय |
72-75 | Hindi |
| 75 | सृष्टि विकास का भारतीय- चिन्तन डॉ. पूनम कुमारी |
67-71 | Hindi |
| 76 | उभरते भारत का साहित्य : राष्ट्रबोध डॉ. पूनम कुमारी |
55-60 | Hindi |
| 77 | भारतीय स्वतन्त्रता के समय वैदिक अध्ययन की स्थितियाँ: एक सिंहावलोकन विद्यावाचस्पतिः प्रो. सुन्दरनारायणझाः |
41-44 | Hindi |
| 78 | भारतीय ज्ञान परंपरा में नाद योग की भूमिका और आधुनिक जीवनशैली में इसकी प्रासंगिकता का अध्ययन सुनील कुमार तिवारी |
31-33 | Hindi |
| 79 | “विकलांगता: एक समावेशी समाज की दिशा में प्रयास” अविनाश विठ्ठलराव अनेराये, प्रिया |
15-21 | Hindi |
| 80 | योग और ध्यान : न्यूरोसाइंस के संदर्भ में वैज्ञानिक विश्लेषण डॉ० प्रीति सिरौटीय |
262-265 | Hindi |
| 81 | পুরাণে মানসিক স্বাস্থ্য নিরুপণ Dipanwita Das Paria, Prof. Dr. Hemanta Bhattacharyya |
259-261 | Hindi |
| 82 | मानसिक स्वास्थ्य में योग की उपादेयता सुनील कुमार तिवारी, डा० मनोज कुमार राठी |
252-254 | Hindi |
| 83 | रामायण में राज्यतन्त्र कमलकान्त |
235-237 | Hindi |
| 84 | हिन्दी साहित्य और भाषाई विविधताः राष्ट् के बहुभाषी स्वभाव की पहचान काव्य के भाषाई रूपांतरण का रहस्य डॉ. सुस्मिता कोरोथ एडवना |
223-225 | Hindi |
| 85 | अष्टांगहृदय में वर्णित छंदों का विवेचनात्मक अध्ययन सोनिका देवी, डॉ. सुदामा सिंह यादव |
210-212 | Hindi |
| 86 | द्रौपदी के विचारों में पतिव्रताधर्म और साम्प्रतिक परिप्रेक्ष्य में उस का औचित् डॉ. पूनम कुमारी |
178-181 | Hindi |
| 87 | भारतीय ज्ञान परम्परा में नैतिक मूल्य डॉ. विचारी लाल मीना |
144-146 | Hindi |
| 88 | क्रियायोग समग्र स्वास्थ्य की आधारशिला रेखा रतूड़ी, डॉ. शोभा पाण्डेय |
137-140 | Hindi |
| 89 | जन्म कुंडली का गोचरगत ग्रहों के आधार पर फलित एवं निदान Nitin Mundra |
134-136 | Hindi |
| 90 | वेदांड्गों की वर्त्तमान शैक्षिक प्रासंगिकता राजेश कुमार |
118-121 | Hindi |
| 91 | वेदों में ललित कलाएं डॉ टुम्पा जाना |
114-117 | Hindi |
| 92 | प्रवासी भारतीय कथा साहित्य में चित्रित स्त्रियां मयंक यादव, डा० रोहित यादव |
110-113 | Hindi |
| 93 | विद्यार्थियों के सामाजिक व्यवहार निर्धारण में सहपाठी दबाव की भूमिका प्रवीण बहुगुणा, प्रो. रचना वर्मा मोहन |
107-109 | Hindi |
| 94 | पाणिनि अष्टाध्यायी की गुण विवेचना डॉ. हरीश चन्द्र शर्मा |
90-93 | Hindi |
| 95 | ध्रुपद गायन : इतिहास और परंपरा डॉ. रेखा मेनारिया |
62-63 | Hindi |
| 96 | वर्तमान समय में शिक्षा का प्रबन्धन और आवश्यकता डॉ. सन्तोष गोड़रा |
45-48 | Hindi |
| 97 | भारतीय ज्ञान-परम्परा में वृक्षायुर्वेद :शास्त्रीय आधार, सिद्धान्त एवं समकालीन प्रासंगिकता का अनुशीलन डॉ० प्रीति सिरौटीय |
258-261 | Hindi |
| 98 | वराहमिहिर एवं भास्कराचार्य की साहित्यिक रचनात्मकता कमलकान्त |
250-254 | Hindi |
| 99 | चीनी इंडोलॉजिस्टों के यात्रा-लेखों में भारतीय सभ्यता प्रभात कुमार |
215-218 | Hindi |
| 100 | जन्म कुंडली में सप्तम भाव के आधार पर विवाह में विचार एवं निदान Nitin Mundra |
212-214 | Hindi |
